राज्य को 1147 करोड़ कम मिलेंगे, योजनाओं की रफ्तार भी धीमी होगी

{पहले मिलते थे 47,000 करोड़, अब 45853 करोड़ रु. ही मिलेंगे केंद्र सरकार ने 16 में वित्त आयोग से केंद्रीय करों में राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी 41% से घटकर 40% करने की अनुशंसा की है। अनुशंसा के अमल में आते ही झारखंड को वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1147 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। राज्य सरकार ने केंद्र से मिलने वाले हिस्सेदारी में 41% को आधार बनाकर बजट बनाते समय 47000 करोड़ रुपए मिलने का प्रावधान किया था। लेकिन, अब इस एक प्रतिशत की कमी से झारखंड को करीब 45,853 करोड़ रुपए ही मिलेंगे। राजस्व में कमी होने पर फ्रीबीज विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, सिंचाई, पेयजल, ग्रामीण विकास जैसी योजनाओं के खर्च की रफ्तार धीमी होगी। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्रीय करों से झारखंड को 42,500 करोड़ रु. मिलने थे। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 1.45 लाख करोड़ का बजट है। 2024-25 में राज्य में 81% ही राजस्व की वसूली हुई थी। वित्त आयोग बंटवारे की करता है सिफारिश वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। यह केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करता है। कर बंटवारे के फैसले के आधार पर ही केंद्र से राज्य को पैसा मिलता है। केंद्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग से फार्मूला में परिवर्तन करने को कहा है। चालू वित्तीय वर्ष 15वें वित्त आयोग की अवधि का अंतिम साल है। 15 वें वित्त आयोग का कार्यकाल 2020-21 से 2025-26 तक ही है। अगले वित्तीय वर्ष के लिए 16 वें वित्त आयोग का गठन हो चुका है। आम तौर पर केंद्र सरकार राजस्व की जो वसूली करती है, उसका बड़ा हिस्सा अपने पास और बचे पैसे को राज्यों के बीच बांटती है। केंद्र पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों को 90:10 के अनुपात में राशि देता है। इसके अलावा संसाधन की कमी वाले राज्यों को राजस्व घाटा अनुदान दिया जाता है। सरकार के पास पैसे की कमी, 3500 करोड़ रु. लिया था लोन राज्य सरकार के पास पहले से ही पैसे की कमी है। राजस्व में कमी होने पर फ्रीबीज विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतिम माह में राज्य सरकार ने आरबीआई के माध्यम से बाजार से 3500 करोड़ रुपए लोन लिया था। उससे पहले दिसंबर में एक दर्जन विभागों से राशि सरेंडर कराकर फ्रीबीज योजनाओं के लिए पैसे जुटाए गए थे। इसका बड़ा कारण राजस्व वसूली में कमी भी था। सिर्फ उत्पाद विभाग ने ही अपना टारगेट पूरा किया था। जानिए… कैसे हुई शुरुआत और क्यों घट-बढ़ रहा​ हिस्सा पहले गाडगिल फार्मूला के अनुसार राज्यों के लिए 32 % हिस्सेदारी तय थी। 14 वें वित्त आयोग ने राज्यों के कर हस्तांतरण के फार्मूले को 32% से बढ़ाकर 42% कर दिया था। इसके बाद जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद 42% को घटाकर 41% कर दिया गया था। अब 40% किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी को कम करने की सिफारिश करने के बाद राज्य और केंद्र के बीच विवाद बढ़ रहा है। झारखंड भी इसमें शामिल हो सकता है। भास्कर एक्सक्लू​सिव

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