झारखंड में मछली उत्पादन के लिए कई तरह के प्रयोग हो रहे हैं। इससे उत्पादन भी बढ़ रहा है। केज और बंद खदान में मछली पालन के बाद अब दुमका में लोग घर के आंगन आैर छत पर मत्स्य बीज पालन कर रहे हैं। पूरे दुमका में आपूर्ति भी कर रहे हैं। इससे सालाना 5 लाख तक की कमाई हो रही है। हर साल मई में बीज डाला जाता है। जून से मत्स्य बीज तैयार होने लगती है। अक्टूबर में बिक्री पीक पर होती है। एक घर से ही करीब डेढ़ से दो क्विंटल मत्स्य बीज प्रतिदिन सप्लाई की जाती है। दो बीज पालकों लक्ष्मी केवट और नीतेश केवट ने रांची आकर ट्रेनिंग भी ली है। दुधानी गांव में गड्ढे में तिरपाल बिछाकर कर रहे मछली पालन दुमका की सरवा पंचायत के दुधानी गांव के रहने वाले लक्ष्मी केवट (50) ने बताया कि घर के आंगन में सीमेंट से बने सात हॉज हैं। इसके अलावा बरसात शुरू होते ही गड्ढा खोदकर नया तिरपाल बिछाकर पानी जमा किया जाता है। फिर कोलकाता से बीज लाकर डाला जाता है। दुमका और आसपास के जिलों में मछली पालन करने वाले लोग उनसे मत्स्य बीज खरीदते हैं। सीजन में हर दिन डेढ़ से दो क्विंटल तक मत्स्य बीज की बिक्री हो जाती हैैं। शुरुआत छोटे पैमाने पर हुई थी। पर, ट्रेनिंग के बाद काम को बढ़ाया। हर सीजन में 4-5 लाख रुपए की कमाई होती है।


