रांची| कैथोलिक कलीसिया के सबसे बड़े धर्म गुरु पोप फ्रांसिस के निधन पर कलीसिया में शोक की लहर है। कैथोलिक कलीसिया के साथ-साथ अन्य चर्चों के पुरोहितों ने भी उनकी मृत्यु पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने संत पीटर स्क्वायर में आखिरी संबोधन किया। उन्होंने सभी को ईस्टर की शुभकामनाएं दी थी। संत फ्रांसिस ने दुनिया को शांति, क्षमा, नम्रता, भाईचारा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पोप फ्रांसिस से व्यक्तिगत रूप से मेरी मुलाकात साल 2016 में वेटिकन में आयोजित 36वें जेनरल कांग्रीगेशन में हुई। वे मीटिंग को संबोधित करने आए थे। उस मीटिंग में विभिन्न देशों के 282 जेसुइट प्रोविंशियल आए थे, संत पापा ने सभी 282 प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। यह मेरे जीवन का पहला अवसर था जब मैं पहली बार उनसे मिल रहा था। वह क्षण मैं हमेशा याद रखूंगा। पोप फ्रांसिस पहले जेसुइट संत पापा थे। इनकी आध्यात्मिकता, जीने का तरीका, जीवन मूल्य सभी संत इग्नाशियुस पर आधारित थी। उनके साथ पहली मुलाकात में लगा जैसे मैं ईश्वर से मिल रहा हूं। संत पापा ईश्वर के प्रतिनिधि होते हैं। साक्षात उनसे मिलकर प्रभु से मिलने जैसा था, लगा येसु का आशीर्वाद मिल रहा है। पोप फ्रांसिस का हृदय सभी के लिए खुला था। क्षमा करने को बड़ा मानते थे। पूरी दुनिया में हो रहे युद्ध को लेकर चिंतित रहते थे। उन्होंने शांति का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने पूरी दुनिया में पर्यावरण संरक्षण की बात कही। कलीसिया को पत्र लिखकर इसे बचाने का आह्वान किया। पोप फ्रांसिस को बीमारों, गरीबों और कैदियों से विशेष प्रेम था। उन्होंने पवित्र गुरुवार को कैदियों के पैर धोए। चर्च, दुनिया और सोसाइटी ऑफ जीसस को उनकी बहुत याद आएगी। उनकी नम्रता, प्यार करने और उदारता से सेवा करने के लिए प्रेरित करती रहेगी। उनकी अगुवाई में चर्च ने नई दिशा पाई। कलीसिया के लिए उनकी मौजूदगी के बिना अगुवाई करना एक बड़ी चुनौती होगी। -फादर अजीत खेस, एसजे, जेसुइट रांची के आर्चडायोसिस के सभी विश्वासियों के साथ मैं भी बहुत दुःख के साथ आपको पत्र लिखकर हमारे प्रिय पवित्र पिता, पोप फ्रांसिस, यूनिवर्सल कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च पादरी के 88 वर्ष की आयु में निधन पर शोक व्यक्त करता हूं। परम पावन ने स्वर्गदूतों और संतों की संगति में हमारे स्वर्गीय पिता के घर लौटने के लिए इस संसारिक जीवन को छोड़ दिया। अब हम उनकी आत्मा को ईश्वर की असीम दया और प्रेम को सौंपते हैं। संत फ्रांसिस मसीह के हृदय के अनुरूप एक चरवाहा थे। अपने शब्दों, अपने कार्यों और अपने प्रार्थनापूर्ण उदाहरण के माध्यम से, उन्होंने चुनौतियों के समय में चर्च का मार्गदर्शन किया। -विंसेंट आइंद , आर्चबिशप ^हमारे प्रिय प्रभु के सेवक पोप फ्रांसिस की निधन का समाचार सुनकर अत्यंत दुख हुआ। ईश्वर उसकी आत्मा को शांति दे। प्रभु के प्रति उनका समर्पित जीवन, आध्यात्मिकता एवं सामाजिक सेवा की भावनाएं कलीसिया में याद किए जाएंगे। विश्व शांति के प्रति पोप फ्रांसिस के द्वारा किए गये प्रयास एवं संदेश हमेशा याद किए जाएंगे। मॉडरेटर बिशप मार्शल केरकेट्टा , जीईएल चर्च, रांची


