अप्रैल में बारिश होने से बाग-बगीचों में तरह-तरह की ढेरों तितलियां देख पा रहे होगें। जो तितलियां हमारे आसपास ज्यादा दिखाई देती हैं, उनमें प्रमुख हैं- प्लेन टाइगर, कॉमन मोरमोन, ब्लू मोरमोन, ग्रास येलो, कॉमन जे और पैंजी समूह की तितलियां। उत्तर भारत की तितलियों के हिंदी नाम रखने वाले रांची के तितली प्रेमी मनीष कुमार बताते हैं कि झारखंड में अब तक 170 प्रजाति की तितलियों को देखा जा चुका है। वैसे देश में करीब 1400 प्रजातियों की तितलियां पाई जाती हैं। रांची के ओरमांझी के पास बने बटरफ्लाई पार्क में इन तितलियों का अच्छा खासा जमावड़ा आपको दिख जाएगा। एक्सपर्ट मान रहे हैं कि बारिश होने से मौसम में सुधार हो रहा है, जिस कारण तितलियां ज्यादा दिख रही हैं। झारखंड में पहली बार बटरफ्लाई फेस्टिवल तितलियों के ऊपर रिसर्च करने और उनके प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए पहली बार दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी में 26 से 28 अप्रैल तक बटरफ्लाई फेस्टिवल का आयोजन हो रहा है। दलमा के रिसर्चर शिलादित्य आचार्जी ने बताया कि इसमें देश के प्रख्यात तितली एक्सपर्ट वीपी यूनिअल आएंगे। साथ ही डॉ. वंदना, देबजानी बसु भी तितलियों की पहचान, पारिस्थितिकी संतुलन व संरक्षण की रणनीतियों पर सत्र का आयोजन करेंगे। कॉमन जे (हरी तिकोनी) : हरे रंग की तितली है जो एक जगह देर तक बैठना पसंद नहीं करती। निंबुई : निंबुई सु्दर-सी तितली है जो अपने नाम के अनुरुप नींबू के पौधों पर अपने अंडे देती हैं। कॉमन मोरमोन : कॉमन मोरमोन काले-सादे रंग की तितली है, जिसे करी पत्ते का पौधा लुभाता है। ग्रास येलो (हल्दीया) : पीली तितली कॉमन है, लेकिन हल्दिया गाढ़ी पीली होती है। पंख में स्पॉट्स हैं। हेज ब्लू (झाड़ नीली) : पीछे से देखने से ब्राउन है, लेकिन पंख खोलने में लाइट ब्लू नजर आती है। ब्लू मोरमोन (बड़ा बहुरूपिया) : इसे भारत की चौथी सबसे बड़ी तितली होने का दर्जा मिला है। प्लेन टाइगर (कोरी विषैली) : आसानी से दिखने वाली प्लेन टाइगर मूलतः नारंगी रंग की तितली है, जिसके पंखों में जिसे हिंदी में अखाद्य होने की वजह से हिंदी में कोरी विषैली के नाम से जाना जाता है। रांची में इन तितलियों को आसानी से फूलों के आसपास देखा जा सकता है {पिकॉक पेंसी (नारंगी मंडला) : पैंजी समूह की तितलियां जिन्हें हिंदी में मंडला के नाम से बुलाते हैं। अपने परों पर आंख सदृश रचनाओं के लिए ये पहचानी जाती हैं।


