चित्तौड़गढ़ जिले की डूंगला पंचायत समिति में कार्यरत कनिष्ठ सहायक (LDC) मदनलाल मीणा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), चित्तौड़गढ़ ने रिश्वत लेने के मामले में FIR दर्ज किया है। आरोपी पर वृद्धावस्था पेंशन के सत्यापन (e-KYC) के नाम पर 3000 रुपए की रिश्वत लेने का आरोप है। यह कार्रवाई ACB की प्रारंभिक जांच और परिवादी द्वारा प्रस्तुत ऑडियो-वीडियो सबूतों के आधार पर की गई है। परिवादी की शिकायत से हुआ खुलासा
ACB के चित्तौड़गढ़ ऑफिस में 30 जनवरी 2025 को एक परिवादी ने उपस्थित होकर एक लिखित शिकायत दी थी। इस शिकायत के साथ परिवादी ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड की गई ऑडियो-वीडियो क्लिप और मोबाइल डिवाइस भी पेश किया। जिसमें पंचायत समिति डूंगला में रिश्वत मांगने की पूरी बातचीत कैद थी। परिवादी ने बताया कि 16 जनवरी 2025 को वो अपनी दादी की वृद्धावस्था पेंशन जो पिछले 12-13 महीनों से बंद थी, को फिर से चालू कराने के लिए पंचायत समिति डूंगला गया था। पेंशन बंद होने का कारण समय पर ई-केवाईसी सत्यापन नहीं हो पाना बताया गया। इस काम के लिए वह संबंधित ऑफिस में मौजूद LDC मदनलाल मीणा से मिला। जहां आरोपी ने पेंशन सत्यापन के बदले 4000 रुपए की रिश्वत की मांग की। परिवादी ने इसकी रिकॉर्डिंग अपने मोबाइल में कर ली और उसे सबूत के तौर पर ACB को सौंप दिया। ACB ने की त्वरित कार्रवाई
परिवादी द्वारा शिकायत और सबूत पेश किए जाने के बाद, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह ने 30 जनवरी को इस संबंध में प्राथमिक जांच पूरी की। जांच में रिकॉर्डिंग और परिवादी की बातों की पुष्टि होने पर पूरी रिपोर्ट ACB मुख्यालय को भेजी गई। जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि आरोपी मदनलाल मीणा ने लोक सेवक होते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया और परिवादी से 3000 रुपए की रिश्वत ली गई। ऑडियो-वीडियो सबूतों ने इस बात की पुष्टि की कि आरोपी ने यह रिश्वत ई-केवाईसी सत्यापन के बदले स्वीकार की थी। मामला दर्ज-जांच जारी
मुख्यालय से परमिशन मिलने के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में आगे की जांच एसीबी, उदयपुर के इंस्पेक्टर नरपत सिंह करेंगे। ACB अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी साक्ष्य जैसे ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग मुख्य भूमिका निभाते हैं। आरोपी के खिलाफ गहन जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एएसपी विक्रम सिंह ने बताया कि परिवादी अगर खुद ऑडियो वीडियो रिकॉर्ड करता है तो तुरंत उसे एसीबी के सामने पेश करें। मुख्यालय में 7 दिनों के अंदर वो रिकॉर्डिंग अगर पेश कर दी जाती है तो कार्रवाई जल्द से जल्द होगी और मामला भी दर्ज कर लिया जाएगा।


