कैग रिपोर्ट पार्ट-3:सरकारी फार्मेसी से सस्ती दवाओं की जगह लघु वनोपज संघ से महंगी दरों पर खरीदी औषधियां

आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण के लिए प्रदेश की इकलौती सरकारी फार्मेसी आमखो में संचालित है। सरकारी फार्मेसी में तैयार होने वाली सस्ती दवाओं की जगह लघु वनोपज संघ से महंगी दरों पर दवाएं खरीदी गईं। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2017 से 22 तक फार्मेसी को 23.16 करोड़ रुपए का बजट दिया था, जिसमें से सिर्फ 7 करोड़ 53 लाख रुपए दवा बनाने के लिए कच्चे माल खरीदने में खर्च हुए हैं। शेष 65 फीसदी राशि तो स्टाफ के वेतन में ही खर्च हो गई। अब स्थिति यह है कि पिछले डेढ़ साल से शासन ने फार्मेसी को दवा बनाने के लिए कच्चा माल खरीदने के लिए बजट ही स्वीकृत नहीं किया है। इसी का परिणाम है कि आयुष विभाग के औषधालयों में मरीजों को पूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं,जिससे उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। वर्ष 2017-22 के दौरान आयुष विभाग की सुनियोजित गड़बड़ी को ऐसे समझें ग्वालियर की सरकारी फार्मेसी 66 से 75 प्रकार की औषधियों का निर्माण कर सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सालयों और औषधालयों को निशुल्क आपूर्ति कर रही थी। वर्ष 2017-22 के दौरान फार्मेसी को बनाए रखने के लिए 23.16 करोड़ रुपए खर्च हुए,जिसमें से 15.08 करोड़ रुपए वेतन और भत्ते पर खर्च किया गया था। 7.53 करोड़ की राशि दवा निर्माण के लिए कच्चा माल खरीदा गया। कैग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017-22 के दौरान दवाओं के उत्पादन में 40 से 79 प्रतिशत की कमी थी। जांच में पाया गया कि ऐसा कच्चे माल की कमी के कारण हुआ। इसके अलावा फार्मेसी द्वारा एमपीपीएचएससीएल दरों पर खरीद के लिए आयुष संचालनालय को कच्चे माल को उपलब्ध कराने की मांग भेजी थी लेकिन उपरोक्त अवधि के दौरान आवश्यक मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध नहीं कराया गया था। 2017-22 के दौरान खरीदी गई दवाओं की कुल लागत में से सरकारी फार्मेसी से खरीदी गई दवाओं की लागत 4 से 19 प्रतिशत के बीच थी। इसके अलावा लघु वनोपज संघ से खरीदी गई दवाओं की दरें सरकारी आयुर्वेदिक फार्मेसी में निर्मित दवाओं की लात से काफी अधिक थी। शासन सरकारी फार्मेसी में दवा कराने के लिए कितना तत्पर है इसका पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि फार्मेसी में जुलाई 2023 में दवा निर्माण के लिए कच्चा माल खरीदने के लिए 1 करोड़ 26 लाख रुपए बजट स्वीकृत हुआ था। डेढ़ साल का समय व्यतीत हो चुका है लेकिन अबतक कोई भी बजट इस साल नहीं आया। ऐसे में जो कच्चा माल है उसी की दवाएं तैयार हो रही हैं। वनोपज संघ व आयुर्वेदिक फार्मेसी की यह हैं रेट

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