रणथंभौर में बढ़ा बाघों का कुनबा:बाघिन‌ RBT-2313 ने फलौदी रेंज में दिया 2 शावकों को जन्म, वन मंत्री ने किया ट्वीट

सवाई माधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व से एक बार फिर अच्छी खबर आई है। रिजर्व की फलौदी रेंज में बाघिन RBT-2313 ने 2 शावकों को जन्म दिया है। इससे वन्य जीव प्रेमियों में खुशी की लहर है।
बाघिन व शावक वन विभाग के कैमरा ट्रैप में कैद हुए हैं। फिलहाल वन विभाग की ओर से बाघिन की मॉनिटरिंग वह ट्रैकिंग लगातार की जा रही है। वन मंत्री संजय शर्मा ने इस संबंध में ट्वीट किया है। बाघिन और शावक कैमरा ट्रैप में हुए कैद
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व की फलौदी रेंज के नाका बोदल के खारिया खाल वन क्षेत्र में बाघिन RBT-2313 व उसके 2 शावक सोमवार को सुबह कैमरा ट्रैप में कैद हुए हैं। जिसकी सूचना वनकर्मियों ने उच्चाधिकारियों को दी। सूचना पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर बाघिन की मॉनिटरिंग और ट्रेकिंग शुरू कर दी गई। बाघिन 79 की बेटी है RBT-2313
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन RBT-2313, बाघिन टी-79 की बेटी है। जिसकी उम्र करीब 4 साल है। बाघिन की टेरेटरी बोदल वन्य क्षेत्र में है। वन मंत्री संजय शर्मा ने किया ट्वीट
बाघिन के शावकों को जन्म देने को लेकर वन मंत्री संजय शर्मा ने सोशल साइट X पर ट्वीट किया है।
उन्होंने लिखा कि
रणथंभौर टाइगर रिजर्व से अच्छी खबर… आज RBT 2313, 4 साल की मादा बाघ को 2 शावकों के साथ कैमरे में कैद किया गया। यह बाघिन RTR के फलोदी रेंज के अंतर्गत बोदल नाका के खारिया खाल क्षेत्र में घूम रही है। नर बाघ RBT 108 इसी क्षेत्र का बाघ है और संभवतः RBT 2313 के इन शावक का पिता है#बाघिन #RBT2313 #RanthamboreTigerReserve रणथंभौर में अब 82 बाघ-बाघिन और शावक
रणथंभौर में 1 अक्टूबर से टूरिस्ट सीजन शुरू हुआ है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में कुल 10 जोन हैं। इनमें 2 पारियों में टाइगर सफारी होती है। सुबह की पारी में सफारी सुबह 6 से 9 बजे तक होती है। शाम की शिफ्ट में सफारी दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक होती है। रणथंभौर नेशनल पार्क 1700 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां 80 बाघ, बाघिन और शावक हैं। एक बाघ को लगभग 35 किलोमीटर टेरेटरी की आवश्यकता होती है। ऐसे में यहां 50 बाघ रह सकते हैं। यानी रणथंभौर में 30 बाघ-बाघिन क्षमता से अधिक हैं। 600 करोड़ का टूरिज्म
रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के सबसे लोकप्रिय टाइगर रिजर्व में से एक है, जो न केवल टाइगर बल्कि अन्य वन्यजीवों के लिए भी महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। साल 2024 में यहां से लगभग 600 करोड़ रुपए का राजस्व होने की उम्मीद है। राजस्थान में 140 से ज्यादा टाइगर
राजस्थान में वर्तमान में टाइगर की संख्या 140 से ज्यादा है। देशभर में इनकी संख्या करीब 3200 है। राजस्थान की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि 1970-72 तक राज्य के लगभग 17 जिलों में टाइगर की मौजूदगी थी। यह मौजूदगी घटकर 2005 में केवल सवाई माधोपुर (रणथंभौर) तक सीमित रह गई। 2010 के बाद शुरू किए गए प्रयासों से अब राजस्थान के 5 जिलों – अलवर, करौली, कोटा, बूंदी और उदयपुर में टाइगर मौजूद है। इन सभी टाइगर का पैतृक घर रणथंभौर ही है। देशभर में लगभग 53 टाइगर पार्क हैं। यह खबर भी पढ़े… 1. रणथंभौर में 7-साल के बच्चे को टाइगर ने मार डाला:गर्दन पर पंजा रखकर जंगल में बैठा रहा; त्रिनेत्र गणेश के दर्शन करने आया था परिवार सवाई माधोपुर के रणथंभौर में टाइगर ने 7 साल के बच्चे को मार डाला। बच्चा अपनी दादी के साथ त्रिनेत्र गणेश के दर्शन कर लौट रहा था। अचानक जंगल से एक टाइगर आया और बच्चे को मुंह में दबोचकर ले गया। टाइगर काफी देर तक बच्चे की गर्दन पर पंजा रखकर बैठा रहा। यह हमला अमराई वन क्षेत्र में हुआ है। (पढ़ें पूरी खबर) 2. रणथंभौर फोर्ट में 24 तक एंट्री बंद:त्रिनेत्र गणेश मंदिर में भी नहीं होगा प्रवेश; लोगों ने फैसले का जताया विरोध-धरने पर बैठे सवाई माधोपुर के रणथंभौर फोर्ट में स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर में प्रवेश पर रोक लगाई गई है। श्रद्धालुओं के लिए त्रिनेत्र गणेश मंदिर में 24 अप्रैल तक एंट्री बंद रहेगी। इसे लेकर वन विभाग ने सोमवार देर‌ शाम एक आदेश जारी किया। इधर मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद करने से नाराज लोगों ने धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है जब तक त्रिनेत्र गणेश मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा, तब तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। (पढ़ें पूरी खबर) 3. बाघिन सुल्ताना के मां बनने की संभावना:टी-107 ने मिश्रदर्रा गेट की गुफा में जमाया डेरा, फोटो-वीडियो आने पर होगी पुष्टि रणथंभौर टाइगर रिजर्व बाघिन टी-107 सुल्ताना के शावकों को जन्म देने की अपुष्ट खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि वनाधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन बाघिन के 3 शावकों को जन्म देने की संभावना जताई जा रही है। वनाधिकारियों के अनुसार बाघिन के शावकों के साथ फोटो वीडियो सामने नहीं आए हैं। बाघिन पिछले कुछ समय‌ से मिश्र दर्रा गेट के पास हम्मीर कुंड‌ पर‌ स्थित एक गुफा में डेरा जमाए हुए‌ है। (पढ़ें पूरी खबर)

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