उदयपुर के महाराणा भूपाल (MB) हॉस्पिटल में छत पंखा गिरने के बाद मरीज की मौत पर अस्पताल प्रशासन ने भले ही मौत को लेकर आरोप नकार दिए लेकिन आज अस्पताल के अंदर बड़ी संख्या आज पंखों की जांच की गई। इस दौरान मैकेनिक को कई पंखों को टाइट करते देखा गया। असल में ट्रोमा वार्ड की तीसरी मंजिल पर मेडिसिन के वार्ड नंबर 104 नंबर में आज अंदर सारे पंखों की जांच का काम सुबह से मैकेनिक ने शुरू किया जो शाम तक चला। चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा के पिपलिया कला निवासी 49 साल के ओमप्रकाश की मौत के बाद एमबी अस्पताल प्रशासन की नींद खुली और आज पंखों को देखने का काम शुरू किया। इस दौरान बाहर के वार्ड के पंखे भी देखे गए। सामने आया कि कई पंखों के नट को टाइट किया गया तो कुछ के नट ही बदले गए। इस दौरान मेकेनिक ने बोला कि जो खराब हो गए उनको बदला है। मरीजों के बीच चर्चा थी कि यह काम पहले ही रूटीन में गर्मी आने से पहले ही करना चाहिए था। इस दौरान जिस मरीज के बेड के वहां पंखा गिरा वहां पर मरीजों के बीच चर्चा थी कि पंखा जब गिरा तब जोर से आवाज आई तब पता चला। मरीजों का कहना है कि घटना करीब चार बजे की थी तब सभी सो रहे थे। बाहर के एक वार्ड में एक मरीज ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जब पंखा गिरा तब एक महिला की जोर से आवाज आई तब वे भाग कर अंदर गए। उस व्यक्ति का कहना था कि पंखा तो मरीज पर ही गिरा था जिस तरह की चोट थी उससे कह सकते है लेकिन यह समझ नहीं आ रहा कि अस्पताल वाले इससे इनकार कैसे कर रहे है। गंभीर रोगी था ता वार्ड में कैसे
एक मरीज ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन गंभीर बीमारी होने की बात कह रहा था कि तो समझ नहीं आ रहा है कि मरीज को वार्ड में क्यों रखा गया। उसे सीधे आईसीयू में ही रखना था। वैसे मरीज के परिजनों ने तो पंखा गिरने की वजह से ही मौत माना और पुलिस को भी यह बात बताई है। मरीज की मौत पर पुलिस को दी रिपोर्ट
उल्लेखनीय है कि रविवार तड़के एमबी अस्पताल के इस वार्ड में पंखा गिर गया। जहां पंखा गिरा उसी के पास के बेड के मरीज ओमप्रकाश की बाद में मौत हो गई। इस मामले में मरीज के परिवार ने पुलिस को रिपोर्ट भी दी है। इधर, एमबी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन ने इस मामले में कहते है कि पंखा गिरने से किसी प्रकार की ओमप्रकाश को हेड इंजरी नहीं हुई थी। पोस्टमॉर्टम में भी सिर में चोट लगने की पुष्टि नहीं हुई। उनकी मौत बीमारी के कारण ही हुई है।


