आरआरडीए के पूर्व चेयरमैन महेश्वर प्रसाद मिश्रा को एसीबी कोर्ट द्वारा नक्शा विचलन के आरोप से मुक्त कर दिया गया। इनके खिलाफ वर्ष 2009 में एसीबी के तत्कालीन निरीक्षक दिवा शंकर प्रसाद द्वारा निगरानी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। मामले के तहत अन्य आरोपियों में सरदार गुरुवीर सिंह, दीप नारायण शर्मा, गोपाल दास,राजीव रंजन, अशोक कुमार और भुवेश बुटाला का भी नाम शामिल है। आरोप था कि मोरहाबादी और लालपुर स्थित निर्माणाधीन बहुमंजिली इमारत का नक्शा की स्वीकृति देने में अनियमितता बरती गई है। भवन प्लान संख्या 1426/2005 और 1449/2005 के तहत नक्शा की स्वीकृति के लिए आवेदन नरेंद्र बुटाला और भुवेश बुटाला द्वारा दाखिल किया गया था। दोनों आवेदन के संदर्भ में यह आरोप था कि तत्कालीन चेयरमैन महेश्वर प्रसाद मिश्रा ने अपने उच्च पद का दुरुपयोग करते हुए स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हुए नक्शे की स्वीकृति दी दी। यह भी आरोप था कि उक्त भवन प्लान से संबंधित जमीन का म्यूटेशन नहीं कराया गया था। फिर भी सिर्फ शपथ पत्र के आधार पर नक्शे की स्वीकृति दे दी गई थी। दूसरे भवन प्लान में यह आरोप था कि बहुमंजिली इमारत 30 मीटर से अधिक की ऊंचाई होने के बावजूद नक्शे की स्वीकृति दी दी गई। इस मामले में एमपी मिश्रा ने अपने आप को निर्दोष बताते हुए सर्वप्रथम एसीबी कोर्ट में डिस्चार्ज आवेदन दाखिल किए थे। जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद महेश्वर प्रसाद मिश्रा हाई कोर्ट में रिवीजन दाखिल की। रिवीजन को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने निचली अदालत को फिर से सुनवाई कर आदेश पारित करने का निर्देश दिया। तब महेश्वर प्रसाद मिश्रा ने एक बार फिर एसीबी कोर्ट में डिस्चार्ज आवेदन दाखिल कर अपने आप को निर्दोष बताया।


