8वीं पास किसान केंचुआ खाद से बना मालामाल:टॉकीज का काम फेल हुआ तो खेती की, अब जिले में सबसे बड़ा वर्मी कंपोस्ट यूनिट

झालावाड़ के एक किसान ने जैविक खेती से आत्मनिर्भरता की उड़ान भरी है। खेती में अधिक लागत और कम मुनाफे की बात कहकर जहां कुछ लोग खेती छोड़ रहे थे, वहीं जिले के रायपुर गांव के इस किसान ने जैविक खेती में इतिहास रच दिया। किसान राजेंद्र सिंह झाला मात्र आठवीं कक्षा तक पढ़े हैं, लेकिन खेती में नवाचार कर कम लागत में आज ये मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। राजेंद्र सिंह अपने 8 बीघा खेत में 32 बेड में केंचुआ की खाद तैयार करते हैं। इस जैविक खाद का इस्तेमाल कर वे गेहूं, प्याज, भिंडी और कई फसलें तैयार कर चुके हैं। खेतों में पैदा होने वाली उपज के अलावा वे केवल खाद बेचकर सालाना 4 लाख रुपए तक की अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। पानी की किल्लत न हो इसके लिए खेत में पौंड बनवाया। दूसरे किसानों को प्रेरित किया। यही कारण है कि इन्हें कृषि रत्न सम्मान और नवाचार पुरस्कार से नवाजा गया। म्हारे देस की खेती में आज बात झालावाड़ के किसान राजेंद्र सिंह झाला की…. झालावाड़ के रायपुर गांव में रहने वाले किसान राजेंद्र सिंह झाला जैविक खेती में मिसाल कायम कर चुके हैं। 59 साल के राजेंद्र सिंह 8वीं पास हैं। वे झालावाड़ जिले के सबसे बड़े वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के मालिक हैं। किसान राजेंद्र ने बताया- 2021 में मैंने कृषि विज्ञान केंद्र झालावाड़ से ट्रेनिंग ली। इसके बाद जैविक खेती शुरू की। इससे पहले मैं टूरिंग टॉकीज के काम से जुड़ा था। वक्त के साथ यह काम कमजोर पड़ने लगा तो खेती का रुख किया। सोच लिया था कि कुदरती खेती करूंगा। किसी तरह का केमिकल जमीन में इस्तेमाल नहीं करूंगा। इसके लिए वर्मी कंपोस्ट बनाने का विचार आया। मैंने शुरुआत में वर्मी कंपोस्ट के 6 बेड (क्यारियां) बनाए थे, अब ये बढ़कर 32 बेड हो गए हैं। साढ़े 8 बीघा खेत, 6 बीघा में जैविक खेती
किसान राजेंद्र ने बताया- रायपुर में मेरे पास साढ़े 8 बीघा जमीन है। इसमें से 6 बीघा पर जैविक खेती करता हूं। केंचुआ खाद 12 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचता हूं। साल में 3 बार खाद तैयार होती है। इससे कुल 1000 क्विंटल खाद का उत्पादन होता है। जैविक खाद (वर्मी कंपोस्ट) का इस्तेमाल कर मैं गेहूं, सोयाबीन और उड़द जैसी फसलों का उत्पादन लेता हूं। इसके अलावा भिंडी, फली, मटर, प्याज और धनिया जैसी सब्जियां भी उगाता हूं। ऑर्गेनिक गेहूं की कीमत मार्केट में सामान्य गेहूं से 10 रुपए प्रति किलो अधिक मिलती है। सिर्फ वर्मी कंपोस्ट से सालाना 4 लाख की आय हो जाती है। जैविक खेती करने से जमीन की उर्वरा शक्ति में सुधार हो रहा है। मिट्‌टी की उपजाने की क्षमता बढ़ी है। मैं सभी किसानों को जैविक खेती करने की सलाह देता हूं। यह लोगों के लिए, जमीन के लिए, पशुओं के लिए सभी के लिए बेहतर है। केमिकल युक्त खेती से भले उत्पादन अधिक हो जाए, लेकिन जमीन और इंसान की सेहत खराब हो जाती है। यूरिया और रसायन युक्त पेस्टिसाइड का इस्तेमाल करने से जो फसल पैदा होती है, उसके चारे से पशुओं की सेहत भी खराब होती है। इसलिए किसानों को पुरखों की खेती की तरफ लौटना चाहिए। उनका तरीका जैविक ही था। कोटा से आता है जैविक खाद के लिए गोबर राजेंद्र ने बताया- केंचुए की खाद बनाने के लिए मैं गाय का गोबर ही इस्तेमाल करता हूं। इसके लिए कोटा की गोशालाओं से संपर्क कर रखा है। वहां से वर्मी कंपोस्ट के लिए गाय का गोबर अच्छी मात्रा में मिल जाता है। एक साल में 20 क्विंटल केंचुए तैयार हो जाते हैं। फसलों में कीटनाशक की जगह मैं वर्मी वॉश, वेस्ट डी-कंपोजर और खुद की बनाई नेचुरल दवाएं ही डालता हूं। इससे जमीन के अंदर पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। साथ ही मिट्‌टी में अच्छे जीवाणुओं की संख्या में इजाफा होता है। खेत पर ही बनाया तालाब किसान राजेंद्र ने बताया- जैविक खेती में जमीन के अंदर नमी का बने रहना जरूरी है। 32 बेड की वर्मी कम्पोस्ट यूनिट पर भी लगातार पानी की जरूरत होती है। इस पर रोजाना छिड़काव करना पड़ता है। ऐसे में बारिश का पानी इकट्‌ठा करने के लिए मैंने सरकार से सब्सिडी लेकर खेत में तालाब बनवाया। इससे सिंचाई को लेकर काफी मदद मिली है। बारिश का पानी मीठा और सभी तत्वों से भरपूर होता है। यह सिंचाई के लिए बेहतर है और एक बार पोंड बन जाने के बाद अपने आप पानी इकट्‌ठा हो जाता है। इस तरह की सिंचाई से किसान का पानी का खर्च बहुत कम हो जाता है। जैविक खेती और नवाचार के लिए इलाके के किसानों को किया प्रेरित राजेंद्र ने बताया- मैंने कम लागत में जैविक खेती की और अच्छा उत्पादन लिया। इससे कृषि वैज्ञानिक भी प्रभावित हुए। वे इलाके के दूसरे किसानों को मेरे काम के बारे में बताते हैं। किसान मुझसे जैविक खेती करने का तरीका पूछने आते हैं। वर्मी कंपोस्ट यूनिट कैसे बनाई जाए, इसकी भी जानकारी देता हूं। इलाके के लगभग-लगभग सभी किसान मेरे संपर्क में रहते हैं। ऑर्गेनिक खेती को लेकर हम आपस में जानकारियां साझा करते रहते हैं। मुझे खुशी है कि किसान केमिकल-युक्त खाद का इस्तेमाल छोड़कर जैविक खाद का इस्तेमाल करने लगे हैं। नवाचार के लिए हो चुके हैं सम्मानित किसान राजेंद्र सिंह को आत्मा परियोजना में 2021 में जैविक खेती में नवाचार के लिए झालावाड़ जिले में प्रथम कृषक पुरस्कार मिला। इसके बाद 2023 में स्टेट लेवल पर राज्य स्टेट डेवलपमेंट बोर्ड जयपुर की ओर से उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। अगले ही साल 2024 में उन्हें झालरापाटन में जैविक खेती के लिए कृषि रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। झालावाड़ के कृषि वैज्ञानिक सेवाराम का कहना है कि किसान राजेंद्र ने बेहतरीन काम किया है। जैविक खेती वही है जिसमें मार्केट में खाद के नाम पर मिलने वाले जहर से खेतों को मुक्त कर दिया जाए। सेवाराम ने बताया कि जैविक खाद यानी जीवांश खाद का इस्तेमाल करते हुए किसान गोबर और वर्मी कंपोस्ट से बेहतरीन खाद से खेती कर सकते हैं। वर्मी कंपोस्ट खाद में गोबर की खाद से तीन गुना ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। वर्मी कम्पोस्ट से लाभकारी सूक्ष्म जीवों की मात्रा बढ़ती है। कार्बनिक तत्व भी बढ़ते हैं। वर्मी कंपोस्ट यूनिट से सालभर आमदनी निकाली जा सकती है। खाद का खर्चा भी बचाया जा सकता है। ———————— खेती-किसानी से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें.. जिम ट्रेनर का काम बंद हुआ तो शुरू की ऑर्गेनिक-खेती:वॉट्सएप ग्रुप बनाकर सब्जी-दूध की होम डिलीवरी; 30 लोगों को दी जॉब कोरोना काल में जिम ट्रेनर का काम बंद हुआ तो उसे ऑर्गेनिक खेती करने का आइडिया आया। ट्रेनर ने 25 बीघा जमीन खरीदी। गिर समेत कई नस्लों की 18 गायें खरीदी और आधुनिक तरीके से न केवल ऑर्गेनिक खेती की। (पढ़ें पूरी खबर)

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