भास्कर न्यूज| जांजगीर आज के बदलते सामाजिक परिवेश में बच्चों की सुरक्षा एक गंभीर विषय बन चुका है। सामाजिक अपराध और यौन शोषण की घटनाओं में बढ़ोतरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों को आत्म-सुरक्षा की जानकारी देना बेहद जरूरी हो गया है। इसी कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता काजल कसेर के नेतृत्व में जय भारत स्कूल परिसर में ‘गुड टच-बैड टच’ विषय पर एक जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में स्कूल के नन्हे बच्चों को सरल भाषा में यह बताया गया कि कौन सा स्पर्श ‘गुड टच’ यानी अच्छा स्पर्श है और कौन सा ‘बैड टच’ यानी बुरा या असहज स्पर्श हो सकता है। काजल कसेर ने कहा कि आज के समय में बच्चों को इस तरह की जानकारी देना समय की मांग है। उन्होंने कहा, “हमारे समाज में बच्चों के साथ होने वाले शोषण के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। बच्चे अक्सर डर या शर्म के कारण अपनी बात कह नहीं पाते। यदि उन्हें शुरुआत से ही अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान कराई जाए, तो वे समय रहते खतरे को पहचानकर अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकते हैं।” सेमिनार के दौरान बच्चों को उदाहरणों के माध्यम से अच्छे और बुरे स्पर्श में अंतर समझाया गया। बच्चों को यह भी सिखाया गया कि यदि कोई उन्हें गलत तरीके से छुए, तो वे न केवल “नहीं” कहें, बल्कि उस स्थिति से दूर भागें और अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत बताएं। बच्चों को कुछ व्यवहारिक अभ्यास भी कराए गए। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षिका शालिनी सिंह ने बताया कि बच्चों को केवल पाठ्य पुस्तकों से शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें जीवन से जुड़े मूल्यों और सुरक्षा के बारे में भी जागरूक करना बेहद जरूरी है। इस अवसर पर विद्यालय के अन्य शिक्षक-अभिभावक जैसे अमन नामदेव, अंजू यादव, कृष्णा और ममता भी मौजूद रहे। बच्चों को उदाहरण देकर समझाएं {उदाहरण देकर: वास्तविक जीवन के उदाहरणों से उन्हें समझाएं। { अभ्यास कराएं: उन्हें यह अभ्यास कराएं कि अगर कोई गलत व्यवहार करे तो क्या करना चाहिए। { खुली बातचीत: बच्चों को हमेशा यह प्रोत्साहन दें कि वे किसी भी असहज अनुभव को आपसे साझा करें।


