राजन गोसाईं | अमृतसर नशे के आदी युवाओं को नशे से मुक्ति दिलाने के लिए पंजाब पुलिस की ओर से कदम उठाए जाने लगे हैं। एक ओर जहां पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है तो दूसरी ओर नशे के आदी युवाओं को नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती करा रही है। एक हफ्ते में सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरी इलाकों के करीब 80 युवा नशे से छुटकारा पाने के लिए सेंटर में उपचार करा रहे हैं। सीमावर्ती रमदास थाना क्षेत्र के 3 युवाओं को अमृतसर के मेडिकल कॉलेज स्थित स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र में पहुंचाने आए निर्मल सिंह ने बताया कि पहले भी 2 युवकों को केंद्र में लाया गया था। उधर, नशा मुक्ति केंद्र में पहुंचे राजिंदर, रवि और सचिन (काल्पनिक नाम) ने बताया कि वह लंबे समय से नशा कर रहे हैं। वह दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करते हैं, लेकिन नशे की लत पीछा नहीं छोड़ रही थी। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वह केंद्र में आए थे और उस समय से डाक्टरों की ओर से दी जाने वाली दवा का सेवन कर रहे हैं। मगर नशे की लत को पूरी तरह से खत्म करने के लिए तीनों ही काफी आतुर हैं। यही कारण है कि जब पुलिस ने उनके पारिवारिक सदस्यों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने भी अपनी सहमति जताई और वह केंद्र में पहुंच गए। स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र में नशा पीड़ितों की ज्यादा आमद के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अमृतसर के एडीसीपी इन्वेस्टिगेशन आरपीएस संधू ने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव देवगन, केंद्र के मुखी डा. खुशविंदर सिंह और डा. राजीव अरोड़ा के साथ बैठक की। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था में आ रही दिक्कतों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद एडीसीपी संधू ने बताया कि नशे के आदी युवाओं को नशा मुक्ति केंद्रों में पहुंचाया जा रहा है, ताकि वह नशा छोड़कर एक स्वस्थ जीवन जी सकें। वहीं मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव देवगन ने बताया कि सूबे को नशा मुक्त बनाने के लिए डाक्टरों और पुलिस के अधिकारी एक टीम की तरह काम कर रहे हैं। स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र में पहले 50 बेड थे, जिन्हें बढ़ाकर अब एक 100 कर दिया गया है। इसके अलावा 50 बेड रिहैब सेंटर में हैं। उन्होंने बताया कि अगर जरूरत पड़ी, तो सिविल सर्जन अमृतसर के साथ मिलकर विभिन्न स्थानों पर 500 से 700 बेडों का इंतजाम किया जा सकता है।


