स्कूलों में मॉक ड्रिल, शहर में जश्न, लोगों ने लहराया तिरंगा

रांची| गृह मंत्रालय के निर्देश पर बुधवार को शहर के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का अभ्यास कराया गया। शिक्षकों ने जैसे ही सायरन बजाया, बच्चों ने क्लास की बत्तियां बुझा दी, दरवाजे बंद किए और अपने डेस्क के नीचे खुद को सुरक्षित कर लिया। इस दौरान ​प्राथमिक चिकित्सा की भी जानकारी दी गयी। भाजपा नेताओं ने की आतिशबाजी, मिठाइयां बांटी साईं नाथ यूनिवर्सिटी में एनसीसी कैडेट्स ने सायरन बजाना, तत्काल प्रतिक्रिया, प्राथमिक उपचार, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन से संबंधित विभिन्न गतिविधियां कीं। विवि के कुलपति प्रो. डॉ. एस. पी. अग्रवाल ने छात्रों को मॉक ड्रिल के उद्देश्यों के बारे में बताते हुए हमलों की स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने के सुझाव दिए। साईं नाथ यूनिवर्सिटी में छात्रों ने सुरक्षा के गुर सीखे रांची | भाजपा नेता संजय कुमार जायसवाल ने बुधवार को पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद रातू रोड में मिठाइयां बांटी आैर आतिशबाजी की। इस अवसर पर हाथों में तिरंगा झंडा लेकर लहराया। उनके साथ मुख्य रूप से ललित नारायण ओझा, शुभम कुमार जायसवाल, राजकुमार जायसवाल, सुजीत वर्मा, ललन सिंह, राजू शर्मा, कुंदन कुमार, सुरेंद्र चौधरी, दिनेश कुमार, रिंकू कुमार सहित कई लोग शामिल हुए। केरालि स्कूल धुर्वा स्थित केरालि स्कूल की दूसरी से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों ने सायरन बजते ही सबसे पहले बत्तियों को बुझाया और अपने-अपने डेस्क के नीचे छिप गये। प्रिंसिपल राजेश पिल्लई ने छात्रों को आपातकालीन परिस्थितियों में उचित कदम उठाने के तरीके बताए। योगदा सत्संग कॉलेज योगदा सत्संग कॉलेज में एनएसएस इकाई-2 ने मॉक ड्रिल का आयोजन किया। मर्चेंट नेवी में कार्यरत रवि सिंह ने छात्रों को आपदा के समय अपनाई जाने वाली महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रक्रियाओं, तथा प्राथमिक उपचार की जानकारी दी। सेंट माइकल स्कूल सीटीओ निशांत कुमार के मार्गदर्शन में एनसीसी कैडेट और अन्य छात्रों ने मॉक ड्रिल अभ्यास में भाग लिया। छात्रों को सुरक्षा प्रोटोकॉल, निकासी मार्ग और आश्रय प्रक्रियाओं के बारे में निर्देश दिए गए। प्रिंसिपल डॉ. सुभाष कुमार ने ऐसी पहल को महत्वपूर्ण बताया है। शारदा ग्लोबल स्कूल यहां छात्रों को सरकार द्वारा जारी विडियो दिखाया गया। सायरन बजते ही सारे बच्चे पर्दे लगाकर बेंच के नीचे छिप गए। बाहर जो छात्र थे वे अपने बचाव के लिए सिर के पीछे हाथ रखकर लेट गए। मॉक ड्रिल में प्राथमिक उपचार करना सिखाया गया।

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