दुर्ग जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा और देखभाल के लिए दिए जाने वाले सामान में भारी धांधली की गई है। केंद्रों में पहुंचाए गए सामान में हाथ धोने वाले साबुन के पैकेट को चूहों ने कुतर दिया है। जंग लगे हुए नेल कटर दिए गए। टूटे टब और टूटी कंघी। फटी-टूटी टॉयलेट क्लीनर की बोतल भेजी गई है। यह किसी एक केंद्र का नजारा नहीं है, बल्कि दुर्ग जिले के अधिकतर केंद्रों में इसी तरह के टूटे-फूटे सामान को भेजा गया है। इतनी बड़े पैमाने पर धांधली सामने आने के बाद जिले के महिला एवं विभाग के अफसर संचालनालय का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इस गोलमाल की जानकारी भास्कर टीम को लगने पर टीम ने एक-एक आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा किया। 1507 आंगनबाड़ी केंद्र में करीब 55 से 60 फीसदी केंद्रों यानी करीब 750 से 800 केंद्रों में टूटा सामान भेजा गया। टीम करीब दो दिनों तक लगातार दुर्ग शहरी के पोटिया, नयापारा, पोटियाकला, शंकर नगर, दुर्ग ग्रामीण के ननकट्टी, चंदखुरी, हनोद, जेवरा, उतई, भिलाई 01 परियोजना के कैंप, कोहका, मॉडल टाउन, खुर्सीपार, मरोदा, धमधा परियोजना के धमधा, डंगनिया, पाटन के पटरेट, गंडनिया, जामगांव के अम्लेश्वर, पाहंदा समेत अन्य केंद्रों में पहुंचे। मौके पर जाकर टीम को जानकारी मिली कि परियोजना स्तर से आंगनबाड़ी केंद्रों में डिटर्जेंट पाउडर, हाथ धोने के साबुन, फूल और नारियल, झाड़ू, पोछा, टॉयलेट क्लीनर, प्लास्टिक की बाल्टी, डस्टबिन समेत अन्य सामान खरीदी की गई। हाल में ही आंगनबाड़ी केंद्रों वितरण किया गया। केंद्रों में गुणवत्ताहीन सामग्रियों का वितरण कर दिया। प्लास्टिक के टब, जग, बाल्टी, कंघी इतने घटिया क्वालिटी के थे। सामान को ट्रांसपोर्ट करके केंद्र तक पहुंचाने में टूट गए।सबसे ज्यादा दुर्ग में गड़बड़ी: जिले में पाटन परियोजना में सबसे ज्यादा 267 केंद्र हैं। दुर्ग ग्रामीण में 222, दुर्ग शहरी में 221, भिलाई-01 में 193 केंद्र, जामगांव-एम में 184, धमधा में 180, अहिवारा में 162 और भिलाई-02 में 78 आंगनबाड़ी केंद्र है। सभी केंद्रों में आकस्मिक व्यय के लिए डायरेक्टरेट से राशि का आवंटन किया गया। उस आधार पर परियोजनाओं ने सामग्रियों की खरीदी की, लेकिन टूटे टब और बाल्टी समेत जंग लगे नेल कटर दुर्ग शहरी परियोजना के तीतुरहीड, पोटिया, शंकर नगर और शिवपारा में ज्यादा मिले। इसी तरह अहिवारा के मुरमुंदा, गिरहोला, अहिवारा, कुम्हारी। धमधा के पेंड्रावन, कोडिया के आंगनबाड़ी केंद्र पर लोकल कंपनी का लो क्वालिटी का सामान भेजा गया। एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालने में जुटे रहे अफसर
महिला एवं बाल विकास विभाग में 8 परियोजनाओं के माध्यम से 1507 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जाता है। केंद्रों में उपयोग होने वाली सामग्री के लिए प्रति केंद्र 800 से 1000 रुपए राशि से सामान की खरीदी की जानी थी। लेकिन अधिकारियों ने पैसे बचाने के लिए साबुन, डिटर्जेंट और प्लास्टिक के सामान लोकल क्वालिटी का खरीदा। इस संबंध जब दुर्ग जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी राजकुमार जामुलकर से बात करके जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं परियोजना अधिकारियों का कहना था कि सामग्री के सामान की खरीदी जैम पोर्टल से की गई है। उस पर लिस्टेड एजेंसी ने भी सामग्रियों की सप्लाई की है। मामले को संज्ञान में ले लिया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों में किस तरह की सामग्री सप्लाई की गई है। इसकी जानकारी कराई जाएगी, जो भी तथ्य सामने आएंगे। उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
– अभिजीत सिंह, कलेक्टर दुर्ग डायरेक्टरेट से बड़े सामान की खरीदी की जाती है। छोटी-छोटी सामग्री के लिए जिले की डिमांड के मुताबिक राशि का आवंटन कर दिया जाता है। किस केंद्र में कितनी और क्या सामग्री खरीदनी है।
– दिलदार सिंह मरावी, संयुक्त संचालक, महिला-बाल विकास


