भास्कर न्यूज | अमृतसर नगर निगम चुनाव में 40 सीटें जीतने वाली कांग्रेस हाउस बनाने की तैयारी में लग गई है। इसके लिए एक तरफ बैठकों का दौर शुरू हो गया है तो दूसरी तरफ आजाद जीते 8 पार्षदों में से आधे से अधिक कांग्रेस के साथ आने को तैयार हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी 4 दिन में हाउस बनाने का दावा पेश कर देगी। वहीं पार्टी हाईकमान भी तब तक मेयर का फैसला कर देगा। चुनाव में कांग्रेस को 40, आम आदमी पार्टी को 24, भाजपा को 9, अकाली दल का 4 सीटें मिली थीं तो आजाद तौर पर 8 लोग जीते। खैर, अपना हाउस बनाने के लिए कांग्रेस को कम से कम 43 उम्मीदवार होने चाहिए। सूत्रों के मुताबिक यह काम कठिन नहीं है क्योंकि आजाद उम्मीदवारों में से 4 साथ आ गए हैं। हालांकि कांग्रेस और साथ आने वाले पार्षद हाउस के गठन तक अपना नाम जगजाहिर करना नहीं चाहते। इन चार के अलावा 8 आजाद पार्षदों में शामिल नीतू टांगरी पहले से कांग्रेस के समर्थन से जीती हैं। इसलिए कांग्रेस के पास बहुमत के जरूरी 43 के आंकड़े से भी 2 पार्षद ज्यादा का समर्थन रहेगा। पदाधिकारियों का कहना है कि जो 4 आजाद उनके साथ आए हैं, उनके परिवार पहले से ही कांग्रेसी हैं। रविवार को एक होटल में वरिष्ठ नेताओं पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी, पूर्व सांसद जसबीर सिंह डिंपा, कांग्रेस के जिला शहरी प्रधान अश्विनी पप्पू और पूर्व विधायक इंद्रबीर सिंह बुलारिया ने बैठक की। और पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस सिलसिले में पार्टी दफ्तर में सोमवार को भी बैठक है। मेयरशिप के लिए पूर्व डिप्टी सीएम ओप सोनी के पार्षद भतीजे विकास सोनी और पार्षद राजकंवलप्रीत सिंह लक्की दौड़ में हैं। इसके लिए खींचतान शुरू हो चुकी है। खैर, सोमवार की बैठक के बारे में प्रधान पप्पू का कहना है कि सभी विजेता उम्मीदवारों के साथ पार्टी दफ्तर मे गेट-टू-गेदर रखी गई है। रही मेयर बनाने की बात तो वह हाईकमान तय करेगा। पार्टी जल्द हाउस बनाने का दावा पेश कर देगी। आजाद चुने पार्षदों में वार्ड 4 से मनदीप सिंह आहूजा आप से टिकट चाहते थे, 32 से जगमीत सिंह आप से जुड़े रहे हैं, 70 से विजय कुमार, 78 से अनीता शर्मा 63 से ऊषा रानी और 67 से अनीता कांग्रेस से टिकट चाहते थे, 64 से नीतू टांगरी को कांग्रेस ने समर्थन दिया था और 85 से नताशा गिल आप से टिकट चाहती थी। आजाद पार्षद अनीता रानी, ऊषा रानी, जगमीत सिंह, नताशा गिल, अनीता शर्मा, विजय कुमार और मंदीप सिंह आहूजा का कहना है कि उन्हें जनता ने चुना है। इसलिए वह लोग अपनी टीम और वार्ड के लोगों से बातचीत करने के बाद ही किसी बात पर विचार कर सकते हैं। उन्हें कांग्रेस पार्टी में जाना है या नहीं इसका फैसला वार्ड की जनता को करना है।


