भास्कर न्यूज | लुधियाना भारत-पाक में बढ़ती जंग के बीच शुक्रवार को लुधियाना शहर में अफवाहों की वजह से खौफ बढ़ता चला गया। जिला प्रशासन ने ब्लैकआउट की घोषणा नहीं की, फिर भी रात 8 बजे के बाद सड़कें सूनी होने लगीं। रात 2 बजे अचानक ब्लैकआउट कर दिया गया। लोग घबराकर प्रशासन द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने लगे। यह लगातार स्विचऑफ आता रहा। कुछ देश के दुश्मन अब भी नहीं मान रहे… रातभर शराब ठेकों पर जगमग लुधियाना , शनिवार , 10 मई , 2025 लुधियाना रेलवे स्टेशन के पास ब्लैकआउट होने के बावजूद शराब के ठेके खुले रहे। लाइटें जलती रहीं। फोटो- कंवलदीप डंग श्री माछीवाड़ा साहिब| शुक्रवार को दोपहर 1 बजे आसमान में एक विमान ने अंगारे छोड़े तो लोगों में डर का माहौल पैदा हो गया। यह दृश्य गांव काउंके, अकालगढ़ और छौड़िया से दिखा। इसका वीडियो सामने आने के बाद एसएसपी खन्ना डॉ. ज्योति यादव टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। छानबीन के बाद उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना ने अभ्यास किया है। इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। तनाव के कारण दिल्ली, यूपी, बिहार की तरफ जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ी है। शुक्रवार को टाटानगर जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में लोग खचाखच भरे थे। रेलवे ने अमृतसर, जम्मू और कुछ अन्य स्टेशनों पर एक-एक ट्रेन के रैक रिजर्व में रखे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें चलाया जा सके। सिविल अस्पताल में रात 11 बिजली बंद कर दी गई। एसएमओ ने बताया कि ऐसे आदेश मिले हैं। अस्पताल के प्रांगण, मेन गेट, बच्चों के पार्क, जच्चा-बच्चा केंद्र के सामने का इलाका, इमरजेंसी के पास भी बिजली बंद रखी गई। वार्डों के अंदर बिजली सुचारू है। सब्जी मंडी में दो दिन से आलू और प्याज खरीदने वालों की भीड़ रही। मंडी में रोजाना आलू-प्याज के 20 ट्रक आते थे, अब यह संख्या बढ़कर 25 ट्रक हो गई है। आढ़ती गुरविंदर सिंह ने बताया कि आलू-प्याज के थोक दाम 5 प्रति किलो बढ़ गए हैं। जो लोग पहले 10 किलो सामान लेते थे, अब पूरा बोरा (लगभग 50 किलो) लेकर जा रहे हैं। दूसरी ओर, लुधियाना पेट्रोल-डीजल पंप एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक सचदेवा ने बताया कि तनाव की खबरों के चलते पेट्रोल-डीजल की डिमांड बढ़ गई है। रोजाना के मुकाबले तेल की मांग 60% बड़ी है। {रसोई गैस की बुकिंग भी बढ़ी… इंडेन गैस सर्विस के अनुसार, शहर में रोज की डिमांड 18-19 हजार के करीब रहती थी, जो बढ़कर 22 हजार हो गई है। एचपी गैस की बुकिंग 9 हजार के करीब रहती थी, वह अब 12-13 हजार हो गई है। विमान ने अंगारे छोड़े, ये सेना का युद्ध अभ्यास था ट्रेनों में भीड़, रैक रिजर्व रखे अस्पताल में भी बिजली बंद लेकिन, सब्जी मंडी में दिनभर भीड़, आलू-प्याज के दाम अचानक बढ़े कर्नल ग्रेवाल ने डेमो देकर बताया कि हमले में परिवार को कैसे बचाया जा सकता है। भास्कर एक्सपर्ट ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुई जंग सेना अपने तरीके से लड़ रही है, लेकिन नागरिकों को भी बेहद जरूरी और आसान तरीके अपनाने होंगे। जान बचाने के लिए कहीं भागने की जरूरत नहीं है। घर में ही कई जगहें ऐसी होती हैं, जहां बच्चे-महिलाएं-बुजुर्ग बेहद आसानी से किसी भी मिसाइल हमले से बच सकते हैं। उन्हें बस जागरूक होने की जरूरत है। कर्नल ग्रेवाल 1965 और 1971 की जंग में शामिल रहे हैं। उन्होंने जंग में काम आने वाले कुछ तरीकों पर बात की। दरअसल, जंग सबको मिलकर पूरी तैयारी के साथ लड़नी होती है, समझदारी से और एकता से। मकान गिर भी जाए तो अलमारी कम ही टूटती है – जब हमले का सायरन सुनाई दे तो घर में लकड़ी की अलमारी के अंदर या टेबल के नीचे बैठ जाएं। ये बेहद सुरक्षित जगहें होती हैं। क्योंकि, अगर घर गिर भी जाए तो अलमारियां कम ही नहीं टूटतीं। घर में अलमारी या टेबल न हों तो घर के पिलर को पकड़ कर खड़े हो जाएं या बाहर लगे पेड़ का सहारा लें। समय हों तो गाड़ियों के ऊपर हरी जाली बिछाएं और झाड़ियां डाल दें। क्योंकि अगर गाड़ी नजर आई तो ये मान लिया जाता है कि यहां लोग हैं। इसलिए टारगेट बनने से बचना जरूरी है। अपने-अपने मोहल्लों में लोगों को खुद मोर्चा संभालना होगा – हाउसिंग सोसायटियों को 4 जरूरी ग्रुप बनाकर काम करना चाहिए। ऐसा युद्ध के समय जरूरी है। ये इजराइल जैसे देशों से सीखा जा सकता है। पहला- लाइट चेकिंग ग्रुप, जो ब्लैकआउट के समय घूम-घूमकर देखें कि कहीं लाइट तो नहीं जल रही। दूसरा- आग बुझाने वाला ग्रुप, जो युवाओं का ग्रुप होना चाहिए। ये लोग पानी या बाल्टी लेकर आग बुझाएं। तीसरा- राहत ग्रुप, इसका काम थोड़ा मुश्किल जरूर है। लेकिन, ये बेहद जरूरी है। अगर कोई बिल्डिंग गिरती है तो प्रशासन के राहत ग्रुप से पहले लोगों को बचाया जा सकता है। चौथा- फर्स्ट एड ग्रुप, घायलों को प्राथमिक उपचार देने के लिए कुछ लोगों को हमेशा तैयार रखना होगा। {सबसे जरूरी बात… ब्लैकआउट के समय किसी इलाके में एक भी जगह रोशनी दिखती तो पूरा इलाका ही दुश्मन के टारगेट पर आ जाता है। घर, दुकान, गाड़ी हर जगह लाइट बंद रखनी जरूरी है। खिड़कियों पर मोटा पर्दा या ब्लैक पेपर लगाएं, ताकि अंदर की रोशनी बाहर से न दिखे। फ्लैशलाइट या मोबाइल टॉर्च को कपड़े से ढकें। वेस्टर्न पंजाब से आ रहीं ड्रोन हमलों की खबरों का असर लुधियाना शहर में साफ दिखा। जिला प्रशासन ने शुक्रवार को ब्लैकआउट की घोषणा नहीं की थी, फिर भी लोगों ने खुद ही घरों की बिजली बंद रखी। शाम 7 बजे ही ज्यादातर बाजार बंद होने लगे। रात 8 बजे ही ज्यादातर सड़कें सूनी होने लगीं। रात 9 बजे वाहनों की कतार के कारण जाम रहने वाले जगराओं पुल पर इक्का-दुक्का वाहन नजर आए। शहर के ज्यादातर इलाकों में स्ट्रीट लाइटें तक बंद कर दी गईं। रात 12 बजे तक जगमग रहने वाला एलिवेटेड रोड, भारतनगर चौक, ढोलेवाल क्षेत्र, जमालपुर क्षेत्र, चंडीगढ़ रोड, हैबोवाल इलाका, दुगरी और साउथ सिटी आदि की सड़कें खाली पड़ी थीं। ज्यादातर पब, बार, होटल, मॉल 10 बजे तक खाली हो गए। हमलों के खौफ की वजह से दूसरे राज्य के लोग दूसरे दिन भी शहर छोड़ते दिखे। अमृतसर की तरफ जाने वाली ज्यादातर सरकारी और निजी बसों की सीटें आधी भी नहीं भरी थीं, जबकि दिल्ली की ओर जाने वाली बसें ओवर लोड रहीं। निजी बसें जो रात 10 बजे तक सवारियां भरती दिखती थीं, वीरवार को 4 बजे तक सवारियां भरकर निकल चुकी थीं। इनमें ज्यादातर छात्र और श्रमिक थे। प्रतिबंध: आतिशबाजी करने, ड्रोन उड़ाने पर कानूनी कार्रवाई होगी कई कार्यक्रम रद्द: गुरुद्वारों में अब रात को कीर्तन समागम नहीं होंगे मेडिकल इमरजेंसी: अस्पतालों में 46 बेड रिजर्व किए, नया आईसीयू तैयार एसएमओ डॉ. हरप्रीत सिंह ने बताया- आईसीयू उद्घाटन के बाद सोमवार से शुरू होना है, लेकिन अगर आपात स्थिति बनती है तो इसे तुरंत शुरू किया जाएगा। आइसोलेशन वार्ड में 16 अतिरिक्त बेड लगाए जा चुके हैं। रैपिड रिस्पॉन्स टीम बना दी गई है, जो किसी भी इमरजेंसी पर तत्काल प्रतिक्रिया देगी। सीएमसी अस्पताल में 30 बेड रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए हैं। हमले से बचने के लिए टेबल, अलमारी से बेहतर कुछ नहीं कर्नल डीएस ग्रेवाल (रिटा.), 1965-71 के युद्ध लड़ चुके प्रिय पाठक! हमारी सेना पंजाब बॉर्डर पर दुश्मन को हरा रही है, हमें अफवाहों को हराना है… रात 9 बजे… बिना ब्लैकआउट सड़कें सूनीं, बाजार बंद, लोगों ने घरों में बिजली बंद रखी रात 2 बजे… ब्लैकआउट, लोग जागते रहे, प्रशासन सो गया; हेल्पलाइन नंबर नहीं मिला


