भास्कर न्यूज | अमृतसर भारत-पाक के बीच हुए विवाद के दौरान हुई गोलीबारी, बमबारी और ड्रोन हमलों के बाद अजनाला सेक्टर के सीमा से सटे गांवों की एक अलग ही तस्वीर सामने आई है। करीब बीस गांवों की लगभग 50 हजार आबादी की सुरक्षा राम भरोसे हैं। अगर कोई आपराधिक घटना घट जाए, तो उन्हें लगभग 14 किलोमीटर दूरी पर स्थित अजनाला थाना या फिर भिंडी सैदां थाने में जाकर उसकी रिपोर्ट करानी पड़ती है। क्योंकि यहां कोई पुलिस चौकी नहीं है। 7 मई से लेकर 10 मई की रात में जब पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमले किए गए, अजनाला सेक्टर की बीओपी डीएसपुरा, ध्यानपुर, धुग्गा, छन्ना सारंगदेव, खानवाल और बल्लड़वाल में 09 और 10 मई की रात में दोनों ओर से गोलीबारी और मोर्टार हमले हुए। बल्लड़वाल गांव के निवासी विक्की भल्ला और अन्य ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भारत-पाक की जंग की सिर्फ बातें ही अपने बुजुर्गों से सुनी थी। लेकिन जब उन्होंने जंग का रौद्र रूप देखा, तो वह अंदर से पूरी तरह से हिल गए। उन्होंने बताया कि बल्लड़वाल गांव जो सीमा के काफी नजदीक है, के एक भी निवासी के पास न तो कोई हथियार है और न ही इसका कोई लाइसेंस ही बनवाया गया है। उन्होंने बताया कि किसी के साथ कोई झगड़ा हो जाए, तो पता है कि उसके साथ दो-दो हाथ कर लिया जाएगा। लेकिन जब कोई हथियारबंद फौज या सैनिक उनके सामने आ जाए, तो वे उसका मुकाबला तक नहीं कर सकते। बल्लड़वाल गांव के निवासियों ने बताया कि लाइसेंसी हथियार तो बहुत दूर की बात है, बल्लड़वाल और आस-पास के करीब बीस गांवों के लगभग 50 हजार निवासियों की सुरक्षा भी राम भरोसे है। क्योंकि यहां कोई पुलिस चौकी नहीं है। बीएसएफ है, तो वह सिर्फ सीमा की सुरक्षा में तैनात है। लेकिन अगर कोई हथियारबंद गैंग या तस्कर किसी पर कोई हमला कर दे या फिर किसी का आपस में कोई विवाद अथवा झगड़ा हो जाए, तो उसके लिए उन्हें 14 किलोमीटर दूर अजनाला थाना या भिंडी सैदां थाने में जाकर केस दर्ज कराना पड़ता है।


