कोर्ट ने सिविल सर्जन को फटकार लगाते हुए तीन दिनों के अंदर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का दिया निर्देश

दैनिक भास्कर रांची, मंगलवार, 13 मई, 2025 |1 6 भास्कर न्यूज | चतरा अपनी लचर व्यवस्था और कार्यशैली को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाला चतरा के स्वास्थ्य विभाग को इस बार न्यायालय ने फटकार लगाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम व्यवहार न्यायालय चतरा ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में समय पर जख्म प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने के मामले में सिविल सर्जन को फटकार लगाते हुए तीन दिनों के अंदर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए कार्य में लापरवाही बरतने वाले कर्मी के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए इसकी सूचना न्यायालय को देने का निर्देश दिया गया है। न्यायालय के इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मियों की लालफीताशाही उजागर हुआ है। जख्म प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराने के मामले में न्यायालय ने लिया है संज्ञान जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, पंचम व्यवहार न्यायालय चतरा के द्वारा सिविल सर्जन चतरा को लिखे गए पत्र में बताया गया है कि सदर थाना कांड संख्या 150/2024, धारा 341, 342,323,324,326, 307, 452, 379, 504, 506, 34 के तहत जख्मी मो उमेर पिता मो बसीर, लाइन मोहल्ला लियाकत अली रोड चतरा का जख्म जांच प्रतिवेदन समय से उपलब्ध नहीं कराया गया है। पत्र में आगे कहा गया है कि जख्मी मो उमेर का इलाज सदर चतरा में 13 अप्रैल 2024 को कथित रूप से हुआ था। कांड दैनिकी के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि उक्त जख्मी का जख्म प्रतिवेदन कांड के अनुसंधानक को आपके कार्यालय से 10 जून 2024 तक उपलब्ध नहीं कराया गया। अनुसंधानक की माने तो संबंधित कर्मचारी नीरज कुमार से मोबाइल के माध्यम से संपर्क किया तो उनके द्वारा बताया गया कि चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा अभी जख्म प्रतिवेदन तैयार नहीं किया गया है। अनुसंधानक ने आरोप पत्र समर्पित कर दिया। न्यायालय यह समझ पाने में खुद को अक्षम पाता है कि इलाज के पश्चात् एक लंबी अवधि बीत जाने के बावजूद अनुसंधानक को जख्म प्रतिवेदन क्यों नहीं सुपुर्द किया जाता है। आपके कार्यालय से ऐसा किया जाना एक गंभीर प्रतिकूल परिस्थिति को परिलक्षित करता है। इस प्रकार न्यायिक कार्य में बाधा पहुंचाई जाती है। यह न्यायालय इसे गंभीरता से लेता है। न्याय प्रदान करने की प्रणाली में साक्ष्य उपलब्ध कराने में आपके कार्यालय की महती व निर्णायक भूमिका है। अपने इस कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया जाना सर्वथा गलत व अनुचित है। अतः निर्देशित किया जाता है कि प्रस्तुत मामले में जख्मी का जख्म प्रतिवेदन तीन दिनों के अंदर इस न्यायालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। साथ ही इस अकारण विलंब को कारित करने वाले संबंधित जिम्मेवार व्यक्ति पर की गई कार्रवाई से इस न्यायालय को अवगत कराएं।

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