मुंडा सभा केंद्रीय समिति की बैठक केंद्रीय कार्यालय डिबडीह में हुई। इसमें विशेष रूप से पेसा कानून 1996 पर चर्चा की गई। कहा गया कि इन दिनों पांचवीं अनुसूची एवं पेसा कानून 1996 पर विशेष रूप से बहस जोरों से छिड़ा हुआ है। विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा अलग-अलग जगहों पर महासम्मेलन के माध्यम से लोगों को बताने का काम किया जा रहा है। अलग-अलग संगठनों का अलग-अलग विचार सामने आ रहा है। कोई कहता है पेसा कानून, कोई कहता है पेसा कानून लागू करना चाहिए। ऐसा लगता है कि सभी आदिवासी सामाजिक संगठनों में एकरूपता विचार नहीं आने के कारण ही राज्य सरकार भी दुविधा स्थिति में है, जिसके कारण अभी तक पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्र में लागू नहीं किया जा रहा है। मुंडा सभा के महासचिव बिलकन डांग ने कहा कि पेसा कानून आदिवासियों के लिए एक पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के लिए 1996 में बनाया गया है। सभी आदिवासी संगठन एक मंच पर आकर पेसा का प्रारूप तैयार कराएं। बैठक में अध्यक्ष नवीन मुंडू, प्रभु सहाय सांगा, सचिव प्रशासन, सोसन समद, सुभाष कोनगाड़ी, रोयल डांग, पौलूस बुढ, बिमोला टोपनो, शोभा टोपनो, सोमरा होरो, दास टोपनो, आंद्रियस लोमगा बिनीता केरकेट्टा, आसियान सूरीन, कुशल समेत अन्य लोग उपस्थित थे।


