पक्की सड़क से जाने पर डेढ़ किमी दूर पड़ता है स्कूल, बच्चे जाने में नहीं करते हैं इस्तेमाल

संजय पासवान |भदानीनगर भुरकुंडा क्षेत्र में नलकारी नदी गुजरती है। इस नदी के बीच में एक तटबंध है। जिसका पानी जो है, तटबंध से ओवरफ्लो करके झरना की तरह तेज बहाव के साथ गिरता रहता है। नदी के इस तरफ भुरकुंडा पवार हाउस बस्ती है और दूसरी तरफ सौंदा डी पंचायत में एक राजकीयकृत मध्य विद्यालय बर्ड सौंदा है। इस बस्ती के दर्जन भर स्कूली छात्र-छात्राएं है जो डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी बचाने के लिए इस तटबंध का इस्तेमाल कर रहे है। प्रतिदिन छात्र-छात्राएं इसी फिसलन और पानी बहाव वाले रास्ते से हाथ में जूता-चप्पल लेकर आर-पार करते है। आम लोगों ने समझाने के बाद भी ये नहीं मानते। जबकि घर से स्कूल आने-जाने के लिए सुगम रास्ता है। नदी पर पुल है। लेकिन समय बचाने के लिए जान-जोखिम उठाकर नलकारी नदी तटबंध के खतरनाक रास्ते से ही आते-जाते है। तटबंध के एक तरफ लगभग 50 फीट की गहराई है जबकि दूसरी तरफ गहरा पानी लबालब भरा हुआ है। जबकि तटबंध में चलने वाला रास्ता दो फीट का होगा। जिसमें पूरी तरह से काई व फिसलन है। भास्कर अपील : दैनिक भास्कर ऐसे रास्तों से चलने वाले हर किसी से अपील करता है कि इन जगहों पर नही चले। जिसमें किसी भी प्रकार का जानोमाल का नुकसान उठाना पड़ जाए। अगर छात्रों का यही आदत बना रहेगा तो उन्हें देखकर और भी बच्चे ऐसा ही करेंगे। इसलिए ऐसे गहराई व फिसलन वाले रास्ते पर नहीं चलने की बात कही।

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