अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने हजारीबाग के केरेडारी अंचल में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) की चंद्रगुप्त ओपन कास्ट परियोजना से जुड़े 417 एकड़ वन भूमि का दस्तावेज गायब होने के मामले में जांच तेज कर दी है। इस सनसनीखेज मामले में सीआईडी ने सीसीएल के आम्रपाली चंद्रगुप्त एरिया के महाप्रबंधक अमरेश कुमार सिंह, मुख्य प्रबंधक (खनन) मनोज कुमार, चंद्रगुप्त ओसीपी के प्रबंधक संजीव कुमार, महाप्रबंधक कार्यालय और माइनिंग डेवलपर एंड ऑपरेटर (एमडीओ) सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड कंपनी को नोटिस जारी किया है। जल्द ही इनसे पूछताछ की जाएगी। हजारीबाग के बड़कागांव निवासी मंटू सोनी उर्फ शनिकांत ने डीजीपी, राज्य और केंद्र सरकार से शिकायत की थी कि चंद्रगुप्त ओसीसी कोल ब्लॉक परियोजना के तहत हजारीबाग और चतरा जिले में 417 एकड़ वन भूमि के दस्तावेज गायब कर दिए गए। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिला प्रशासन, वन विभाग और सीसीएल अधिकारियों की मिलीभगत से यह षड्यंत्र रचा गया। डीजीपी ने संज्ञान लेते हुए जांच सीआईडी को सौंपी। शिकायत के अनुसार, केरेडारी अंचल के पचड़ा, चट्टी, बरियातू, बुकरू, सिजुआ और जोरदाग मौजा में वन भूमि का अपयोजन (डायवर्सन) किया गया। आरोप है कि 417 एकड़ वन भूमि के मूल दस्तावेज गायब किए गए और इसके बाद यह भूमि हैदराबाद की कंपनी सुशी इंफ्रा एंड माइनिंग लिमिटेड को खनन के लिए आवंटित कर दी गई। दस्तावेजों में छेड़छाड़ का भी आरोप 2021 में अंचल अधिकारी केरेडारी, मनोज कुमार (चीफ मैनेजर माइनिंग) और संजीव कुमार (मैनेजर, चंद्रगुप्त ओसीपी) ने भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक सूची तैयार की, जिसमें रिकॉर्ड गायब होने की बात को छिपाने के लिए खाता और प्लॉट विवरण में छेड़छाड़ की गई। इस सूची में न तो पत्र संख्या थी और न ही तिथि। मुआवजे में अरबों के घोटाले की आशंका शिकायत में दावा किया गया है कि परियोजना में प्रति एकड़ 25 लाख रुपए मुआवजे की दर तय है। 417 एकड़ भूमि के दस्तावेज गायब होने से अरबों रुपए के घोटाले की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ता ने एफआईआर दर्ज कर इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है ताकि सरकारी राजस्व को बचाया जा सके। इसके बाद सीआईडी ने जांच तेज करते हुए नोटिस जारी किया है। रेकॉर्ड गायब होने की प्राथमिकी तक दर्ज नहीं जिन्हें नोटिस भेजा, अब उनसे होगी पूछताछ सीआईडी ने जिन लोगों को नोटिस भेजा है, अब उन सभी से पूछताछ की जाएगी। दस्तावेजों की भी गहनता से जांच की जाएगी, ताकि इस घोटाले के पीछे की सच्चाई सामने आ सके। क्योंकि यह मामला सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार और अफसरों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हजारीबाग की चंद्रगुप्त ओपन कास्ट परियोजना से जुड़ा मामला हजारीबाग उपायुक्त कार्यालय के 26 जून 2022 के पत्र (ज्ञापांक-2350) में 417 एकड़ भूमि का रेकॉर्ड गायब होने की पुष्टि हुई, लेकिन अंचल कार्यालय केरेडारी, राजस्व अभिलेखागार या उपायुक्त कार्यालय ने इसकी प्राथमिकी या सनहा तक दर्ज नहीं किया। वन विभाग ने भी इस मामले में कोई पत्राचार नहीं किया, न ही कागजातों की छानबीन की।


