भास्कर न्यूज| लुधियाना भगवान भवन कुंदनपुरी वृंदावन रोड में महिलाओं द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का पारायण किया जा रहा है। मंगलवार को कथा वाचिका मीना रानी ने गौकरण और धुंधकारी का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि गौकरण और धुंधकारी दो भाई थे। गौकरण धर्मपरायण और वेद-शास्त्रों का ज्ञाता था, जबकि धुंधकारी अधर्मी और भोग-विलास में डूबा हुआ था। अपने दुष्कर्मों के कारण धुंधकारी की मृत्यु अकल्पित परिस्थितियों में हुई, जिसके परिणामस्वरूप उसकी आत्मा प्रेत योनि में भटकती रही। भाई की इस दुर्गति को देखकर गौकरण ने उसे मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया। उन्होंने भागवत कथा का आयोजन किया। कथा के सातवें दिन कथा श्रवण मात्र से धुंधकारी की प्रेत योनि से मुक्ति हो गई और उसे परम धाम की प्राप्ति हुई। यह प्रसंग यह सिखाता है कि सत्संग और भागवत कथा का श्रवण आत्मा को शुद्ध करता है और पापमुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। साथ ही, भक्ति और सद्कर्मों का महत्व उजागर करता है। धुंधकारी के बुरे व्यवहार के कारण उसके माता-पिता बेहद दुखी रहते थे। उन्होंने कहा कि जो संतान माता-पिता को कष्ट देती है और भगवान का स्मरण नहीं करती, उसे जीवन में दुख भोगना पड़ता है। उन्होंने राजा चित्रकेतु का उदाहरण देते हुए बताया कि दस विवाह करने के बावजूद उन्हें पुत्र सुख नहीं मिला। साधु द्वारा दिए फल को पत्नी ने समस्याओं के भय से नहीं खाया। गौकरण-धुंधकारी प्रसंग में बताया कि माता-पिता की मृत्यु के बाद धुंधकारी ने अपना सारा धन वेश्याओं पर लुटा दिया, जिन्होंने बाद में उसकी हत्या कर दी। भाई गौकरण ने श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से उसके मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया।


