सिटी रिपोर्टर | रांची शैक्षणिक सत्र 2025-26 में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम-आरटीई एक्ट 2009 के अंतर्गत 25% अभिवंचित वर्गों के बच्चों का नामांकन निजी स्कूलों में करने को लेकर गुरुवार को लॉटरी होनी थी। समाहरणालय ब्लॉक-ए के एनआईसी सभागार में दोपहर 3 बजे से लॉटरी की प्रक्रिया शुरु हुई भी, लेकिन लॉटरी प्रक्रिया को बीच में ही रद्द कर दिया गया। लॉटरी के दौरान एसडीओ उत्कर्ष कुमार और डीएसई बादल राज को कई गड़बड़ियां मिलीं। निजी स्कूलों में अपने बच्चे को मुफ्त पढ़ाने के लिए अभिभावकों का फर्जीवाड़ा सामने आया। एक ही नाम के दो-दो आवेदन मिले, माता-पिता के नाम में स्पेलिंग बदल-बदल कर रजिस्ट्रेशन कराया गया था। लॉटरी के पहले भी इस तरह के डुप्लीकेसी के 298 आवेदन की पहचान की गई थी। इसके बाद भी लॉटरी के समय डुप्लीकेसी के 179 केस मिले। इस तरह की फर्जीवाड़ा मिलने के बाद एसडीओ ने लॉटरी प्रक्रिया को रद्द कर दिया। सिर्फ जेवीएम, श्यामली स्कूल में 60 सीटों पर लॉटरी की प्रक्रिया सफल रही, जिसे भी बाद में रद्द कर दिया गया। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में आरटीई एक्ट के तहत जिलें के 120 निजी स्कूलों में नामांकन के लिए कुल 1744 आवेदन आए थे। इसमें 9 स्कूलों के 93 सीट के लिए किसी ने आवेदन नहीं दिया था। 75 ऐसे स्कूल थे जिसमें कुल सीट से ज्यादा आवेदन जमा किए गए। 11 स्कूलों में 100 से ज्यादा आवेदन भरे गए। कुल आवेदन में जन्म प्रमाण पत्र में गड़बड़ी के कारण 226 आवेदन और इनकम सर्टिफिकेट में गड़बड़ी के 372 आवेदन रद्द कर दिया गया। सिर्फ 1074 आवेदन को अप्रूवल दिया गया। गुरुवार को 78 स्कूलों में एडमिशन के लिए लॉटरी की प्रक्रिया होनी थी। जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज ने कहा कि आवेदन से संबंधित कई समीक्षा के बावजूद डुप्लीकेसी के कई मामले सामने आ रहे है। चार चरणों में यह काम पूरा होना था, लॉटरी इसका तीसरा चरण था। अभिभावकों की ओर से एक ही बच्चे के लिए दो से तीन आवेदन दिए गए है, जो गलत है। जल्द लॉटरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


