भास्कर न्यूज| खन्ना जिला शिक्षा अधिकारी (एलिमेंट्री) रविंदर कौर ने ब्लॉक खन्ना 2 के स्कूलों की जांच की, उनकी टीम में जिला कोऑर्डिनेटर अनिल मठारू (स्मार्ट स्कूल), जिला कोऑर्डिनेटर मनमीत सिंह और बलदेव सिंह भी शामिल थे। डीईओ रविंदर कौर ने ब्लॉक खन्ना के विभिन्न स्कूलों में नाबार्ड 29 और नाबार्ड 30 के अनुसार स्कूलों की कारगुजारी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान जहां कुछ कमियां पाई गईं, वहीं नेताओं को उन्हें दूर करने के लिए प्रेरित भी किया गया। इस दौरान किशनगढ़, भुमद्दी, ललहेड़ी, रसूलड़ा खन्ना खुर्द और गलवड्डी का निरीक्षण किया गया। कई स्कूल के प्रिंसिपलों द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की गई। भमद्दी स्कूल के प्रिंसिपल जगरूप सिंह ने बताया कि गांव के दानवीरों ने स्कूल भवन के जीर्णोद्धार के लिए करीब 1.5 लाख रुपये की सहायता प्रदान की है। 15 लाख रु. किशनगढ़ के प्रिंसिपल परमिंदर चौहान ने एक ही अध्यापक होने के बावजूद 54 विद्यार्थियों में आत्मविश्वास भरा व्यक्तित्व विकसित करना सराहनीय प्रयास था। रसूलड़ा, ललहेड़ी और खन्ना खुर्द के स्कूल प्रिंसिपलों द्वारा भी सराहनीय कार्य किया गया। ललहेड़ी स्कूल के मुख्याध्यापक ने बताया कि गांव के सहयोग से करीब 200 ट्रॉली भरत की सप्लाई की जा रही है, जोकि सराहनीय पहल है। जिला समन्वयक मनमीत सिंह ने बच्चों की प्रगति जांची, स्मार्ट स्कूल जिला समन्वयक अनिल मठारू ने मुखियों को स्कूलों में प्राप्त अनुदान कार्य को सही ढंग से पूरा करने तथा सरकार की हिदायतों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। डीईओ मैडम रविंदर कौर ने ब्लॉक खन्ना-2 के सीएचटी और स्कूल मुखियों के साथ बैठक की गई, जिसमें बीपीईओ रणजोध सिंह ने सभी अध्यापकों का स्वागत किया। इस अवसर पर बीआरसी शिंगारा सिंह, कुलविंदर सिंह और रूपिंदर सिंह भी उपस्थित थे। चेकिंग के दौरान रविंदर कौर ने नन्हें विद्यार्थियों को बिस्कुट भी बांटे। भास्कर न्यूज|लुधियाना गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी में आयोजित 2 सप्ताह का डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस कार्यक्रम में पंजाब के विभिन्न जिलों से 43 प्रशिक्षु शामिल हुए, जिनमें 40 पुरुष और 3 महिलाएं थीं। प्रशिक्षण के दौरान आवास, प्रजनन, पोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन, एकीकृत खेती, रोग निवारण, सामान्य बीमारियां, स्वच्छ दूध उत्पादन, जैव सुरक्षा, पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियां, दूध व्यवसाय की विपणन नीतियां और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा गहन जानकारी दी गई। समापन समारोह में निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रविन्द्र सिंह ग्रेवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यूनिवर्सिटी पशुपालकों और इससे जुड़े व्यवसायों की अर्थव्यवस्था, स्थिरता और कल्याण को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि डेयरी फार्मिंग अब एक लाभदायक पेशा बन चुका है और इसे अपनाने वालों को यूनिवर्सिटी की ओर से पूरी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने प्रशिक्षुओं की भागीदारी की सराहना करते हुए डेयरी फार्मिंग को एक टिकाऊ पेशे के रूप में अपनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि यह प्रशिक्षण सैद्धांतिक और व्यावहारिक सत्रों का संतुलित संयोजन था। इसका उद्देश्य आधुनिक डेयरी फार्मिंग के लिए आवश्यक वैज्ञानिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था। उन्होंने कहा कि डेयरी फार्मिंग को पेशेवर तरीके से अपनाने के लिए वैज्ञानिक तकनीक और आधुनिक प्रबंधन की समझ जरूरी है।प्रशिक्षण का संयोजन डॉ. जैस्मीन कौर और डॉ. प्रतीक सिंह धालीवाल ने सफलतापूर्वक किया। समापन सत्र में सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। 19 मई से बकरी पालन प्रशिक्षण डॉ. जसविंदर सिंह ने जानकारी दी कि यूनिवर्सिटी 19 मई 2025 से लुधियाना परिसर में पांच दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी करने जा रही है। इच्छुक लोग इस प्रशिक्षण में भाग लेकर आधुनिक बकरी पालन की तकनीकें सीख सकते हैं। यूनिवर्सिटी का यह प्रयास पशुपालन क्षेत्र में नए अवसर उत्पन्न करने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल पशुपालकों को नई तकनीकों से अवगत कराते हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखाते हैं।


