शहर के वार्डों में जरूरतों और समस्याओं का ऑडिट होगा। इसके लिए निजी एजेंसी से अनुबंध किया गया है। ये एजेंसी शहर के सभी 70 वार्डों का सर्वे कर ये रिपोर्ट तैयार करेगी कि किस वार्ड में कौन सी समस्या गंभीर है और वार्ड वासियों को क्या जरूरत है। तीन माह में एजेंसी अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। हालांकि अभी तक मंत्री-विधायकों के करीबी पार्षद अपने वार्डों के लिए कभी भी बजट मंजूर करवा लेते हैं। उनके वार्ड में सौंदर्यीकरण से लेकर सामुदायिक भवन बनाने, पेवर ब्लॉक लगाने, बार-बार नाली बनाने और अन्य विकास कामों पर बेतहाशा खर्च होते हैं। कम रसूख वाले पार्षद छोटे-छोटे कामों के लिए निगम कार्यालय के चक्कर काटते रहते हैं। इस वजह से शहर के कुछ वार्डों खासतौर पर बीचोबीच वाले इलाकों में ज्यादा विकास हो रहा है। आउटर के वार्डों में सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। अब यह विसंगति दूर होगी। वार्डों में उनकी जरूरत के अनुसार काम होंगे। योजनाएं ऐसी बनेंगी, जो अगले 15-20 साल के लिए उपयोगी होंगी। इसके राजधानी के सभी 70 वार्डों में सिटी मॉडल प्लान पर काम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत टाउन प्लानरों की 8 फर्में एक-एक वार्ड का सर्वे करेंगी। तीन महीने में वे अपनी रिपोर्ट सबमिट करेंगी। उसी रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर ही वार्डों में शासन से वार्ड के लिए बजट स्वीकृत होगा। 8 फर्म तैयार करेगी शहर के विकास की रिपोर्ट हर वार्ड की डिटेल सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के लिए नगर निगम ने टाउन प्लानरों से निविदा मंगवायी थी। निविदा खुलने के बाद 70 वार्डों के सर्वे और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 8 फर्म चुनी गईं है। निगम अब इनके साथ अनुबंध कर वर्क आर्डर जारी करेगा। इस महीने के अंत तक वे काम शुरू करेंगी। शहर और वार्डों में अभी बिना प्लानिंग के काम हो रहे हैं। वार्ड पार्षदों से जो प्रस्ताव आते हैं या फिर शासन से जो निर्देश आता है उसके आधार पर वार्डों में विकास के काम किए जाते हैं। इससे उस वार्ड में काम तो हो जाता है, लेकिन इससे शहर का समग्र रूप से विकास नहीं हो पाता। वार्ड में जो बड़ी समस्या होगी उस पर पहले फोकस अब जिस वार्ड में जो समस्या होगी उसी को दूर करने के लिए फोकस किया जाएगा। यानी उसी समस्या के लिए ज्यादा और पर्याप्त बजट दिया जाएगा। जल भराव की समस्या जिन वार्डों में होगी उसे दूर करने के लिए एक संयुक्त प्लान बनेगा। अफसरों के अनुसार सर्वे में इस ओर भी ध्यान दिया जा रहा है कि अगर एक वार्ड में खेल का बड़ा मैदान है, लेकिन उसके बाजू वार्ड में नहीं है। ऐसी दशा में खेल मैदान का विकास इस तरह होगा, जिसका लाभ दोनों वार्डों के लोगों और बच्चों को मिलेगा। इसी तरह वार्डों में छोटे-छोटे सामुदायिक भवन बन जाते हैं। इसमें छोटे समारोह तो निपट जाते हैं, बड़े आयोजन नहीं हो पाते। अब दो-तीन वार्डों के बीच ऐसी बड़ी जगह तलाश कर एक भव्य सामुदायिक भवन बनाने का प्लान किया जाएगा। उसका उपयोग सभी कर सकेंगे। एक वार्ड में मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है तो वहां प्राथमिकता के साथ वे काम होंगे। तीन लेयर में तैयार होगी सर्वे रिपोर्ट नगर निगम ने जिन आठ टाउन प्लानर फर्मों को चुना है, वे निगम के इंजीनियरों के सहयोग से सर्वे कर एक रिपोर्ट तैयार करेंगे। जोन कमिश्नर और सभी पार्षद मिलकर उस रिपोर्ट की उसकी समीक्षा करेंगे। जरूरी होने पर रिपोर्ट में कुछ संशोधन किया जाएगा। कुछ समस्याएं और मांगों को आवश्यकता के अनुसार जोड़ा भी जाएगा। उसी के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जोन से सत्यापित होने के बाद उस रिपोर्ट की समीक्षा महापौर मीनल चौबे अपने एमआईसी सदस्यों के साथ करेंगी। यहां से मंजूरी होने के बाद ही रिपोर्ट फाइनल मानी जाएगी। निगम अफसरों के अनुसार ये पूरी प्रक्रिया वर्क आर्डर के तीन महीने में पूरी होगी। इस पर 1.50 करोड़ खर्च होंगे।


