दुर्ग जिला अंतर्गत जिला सहकारी केंद्रीय बैंक भिलाई तीन की सेवा सहकारी समिति सोमनी में करोड़ों के घोटाले का मामला सामने आया है। यहां की प्रबंधक नीति दीवान, सहायक प्रबंधक गजानन शिर्के और अतरिक्त कर्मचारी गोपाल वर्मा ने मिलकर किसाों के खाते से 1 करोड़ 3 लाख 11 हजार 263 रुपए का गबन किया है। पुरानी भिलाई पुलिस ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पुरानी भिलाई के शाखा प्रबंधक सुरेंद्र सिंह भुवाल की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में हायक प्रबंधक गजानन शिर्के और अतरिक्त कर्मचारी गोपाल वर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं शाखा प्रबंधक नीति दीवान अभी तक फरार हैं। पुलिस प्रवक्ता एएसपी पद्मश्री तंवर ने बताया कि मामला किसानों के बचत खाते से करोड़ों की हेराफेरी का है। किसानों ने अपने खाते में आरोपियों खुद ही रकम जमा किया और खुद ही उसे संचालित किया था। उनके द्वारा किसानों के खाते में पैसा जमा कर पासबुक में एंट्री की जाती थी, लेकिन लेजर में एंट्री नहीं की जाती थी। पुलिस ने जब मामले की जांच की तो यह भी पता चला कि आरोपियों ने मिली भगत करके कुछ किसानों के फिक्स डिपाजिट को भी तोड़कर उस रकम का गबन कर लिया है। पुलिस ने मामले में सहायक प्रबंधक और अतिरिक्त कर्मचारी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। किसानों में मामले को लेकर आक्रोश इस मामले के उजागर होने के बाद यहां के किसानों में काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि वो लोग खून पसीने की कमाई से एक एक पाई जोड़कर पैसा जमा करते हैं। उसे सहकारी केंद्रीय बैंक के पास विश्वास में जमा करते हैं। उनके जिम्मेदार अधिकारियों ने उनकी मेहनत की कमाई पर डाका डाला है। इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इस तरह से की गई गड़बड़ी पुलिस की जांच में यह पता चला है कि तत्कालीन सहकारी समिति प्रभारी गजानंद शिर्के ने 29 मई 2020 से 3 मार्च 2021 के बीच 35 लाख 53 हजार 870 रुपये की वित्तीय अनियमितता की। इसके बाद समिति प्रबंधक के पद पर नियुक्त नीति दीवान ने 1 जून 2022 से 5 अक्टूबर 2023 के बीच 40 लाख 16 हजार 775 रुपये की गड़बड़ी की। इसके अतिरिक्त सहायक लिपिक गोपाल वर्मा ने 5 किसानों के खातों से 3 लाख 3 हजार 618 रुपये का गबन किया है। खाद बीज और धान खरीदी के नाम पर की गड़बड़ी तीनों कर्मचारियों ने किसानों के खाते से खाद, बीज और धान खरीदी के नाम पर नगद आहरण दिखाया। इसके साथ ही किसान जो पैसा जमा करते थे उनकी एंट्री भी लेजर में नहीं करते थे। किसानों की पासबुक में एंट्री करके उन्हें दे दिया जाता था।


