निशाने में चूक, कानून की जानकारी नहीं, प्रोन्नति परीक्षा में रांची के 57% जवान फेल

भास्कर एक्सक्लू​सिव राज्य में साक्षर आरक्षी से एएसआई में प्रोन्नति के लिए आयोजित परीक्षा में राजधानी रांची के 298 आरक्षियों में से 172 फेल हो गए हैं। यानि 57 फीसदी आरक्षी असफल रहे हैं। इन आरक्षियों में से अधिकांश पर राजधानी रांची की सुरक्षा व्यवस्था और विधि व्यवस्था की जिम्मेदारी है। इनमें अधिकांश आरक्षी फायरिंग और आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े कानून (दंड प्रक्रिया संहिता, भारतीय न्याय संहिता, एविडेंस एक्ट) विषय में जानकारी नहीं होने की वजह से फेल हुए हैं। ये करीब 10 वर्षों से कार्य कर रहे हैं। इसके बाद भी इन विषयों में फेल हो गए हैं। सवाल उठता है कि जब इन्हें कानून व्यवस्था की जानकारी नहीं, निशाने में भी कच्चे हैं तो फिर राजधानी की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे। अगर ये सफल हो जाते तो आने वाले समय में इन्हें सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) में प्रोन्नति मिलती, जिसके बाद इनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती। लेकिन अब इन्हें फिर से इन विषयों की परीक्षा में पास होना होगा, जिनमें ये फेल हुए हैं। रांची के जो साक्षर आरक्षी फेल हुए हैं, उन्हें फायरिंग व आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े कानून के विषय की तो पूरी जानकारी नहीं ही है। इसके अलावा भी कई ऐसे विषय हैं, जिसके बारे में आरक्षियों को जानकारी नहीं है और वे फेल हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इनके जिम्मे राजधानी जैसे बड़े शहर की सुरक्षा का भार है। वीवीआईपी मूवमेंट में इनको ड्यूटी दी जाती है। संवेदनशील स्थितियों में इनकी तैनाती होती है। रांची शहर की विधि-व्यवस्था की जिम्मेवारी भी इनके कंधों पर होती है। जब जानकारी ही नहीं होगी तो वे ड्यूटी कैसे करेंगे और कैसे शहर को सुरक्षित रख पाएंगे। परीक्षा से पूर्व 3 माह का प्रशिक्षण भी मिला, फिर भी ज्यादातर फेल साक्षर आरक्षियों को एएसआई में प्रोन्नति देने के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा से पूर्व करीब तीन माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम काफी कठिन होता है। जिसकी शुरुआत सुबह 5 बजे से ही शुरू हो जाती है। सुबह 5 बजे से लेकर 7 बजे तक प्रशिक्षण केंद्रों पर पीटी और दौड़ का आयोजन किया जाता है। इसके बाद सात से 9 बजे तक परेड होती है। फिर सुबह 10 बजे से लेकर दिन के एक बजे तक थ्योरी की पढ़ाई होती है। प्रत्येक थ्योरी क्लास 45 मिनट का होता है। इसके बाद 4 बजे से फिर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होता है, जो दो घंटे तक चलता है। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद इनके लिए परीक्षा का आयोजन किया गया। इसके बाद भी इतनी बड़ी संख्या में आरक्षी सफल नहीं हो सके। इससे लगता है कि प्रशिक्षण के दौरान ये जवान गंभीर नहीं थे। पूरे राज्य में 30 प्रतिशत आरक्षी फेल, 3573 आरक्षी परीक्षा में हुए थे शामिल पूरे राज्य में 30 फीसदी साक्षर आरक्षी इस परीक्षा में फेल हो गए हैं। 3573 आरक्षियों को प्रोन्नति देने के लिए राज्य के तीन प्रशिक्षण केंद्रों सीटीसी मुसाबनी, जंगल वारफेयर नेतरहाट व जेएपीटीसी पदमा हजारीबाग, इन तीन सेंटरों पर 2 से 14 सितंबर 2024 तक लिखित, शारीरिक व मौखिक परीक्षा का आयोजन किया गया था। राज्य भर के 3573 आरक्षी इस परीक्षा में शामिल हुए, इनमें से 1039 परीक्षा में अनुतीर्ण हो गए हैं। इनमें सबसे अधिक रांची जिले के 172 आरक्षी शामिल हैं। वहीं राज्य भर में कुल 2534 को ही इस परीक्षा में सफलता मिली है। जंगल वारफेयर स्कूल, नेतरहाट सेंटर पर सबसे अधिक हुए असफल एक साक्षर आरक्षी को इस परीक्षा में सफल होने के लिए तीन मौके मिलते हैं। सीटीसी मुसाबनी में कुल 1353 साक्षर आरक्षी प्रशिक्षण के बाद परीक्षा में शामिल हुए। इनमें 327 फेल हुए और 1026 को सफलता मिली। जंगल वारफेयर स्कूल नेतरहाट में कुल 759 साक्षर आरक्षी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें 423 अनुतीर्ण हुए और मात्र 336 ही सफल हो सके। वहीं जेएपीसीटी पदमा हजारीबाग में 1461 साक्षर आर​िक्षयों ने परीक्षा दी। इनमें 289 असफल रहे और 1172 को सफलता मिली। सीटीसी मुसाबनी, जंगल वारफेयर नेतरहाट और जेएपीटीसी पदमा हजारीबाग सेंटर पर ली गई थी परीक्षा सबसे अधिक फायरिंग में हुए फेल… आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े कानून की भी अधिकांश को जानकारी नहीं, राज्य भर में 1039 साक्षर आरक्षी हुए हैं अनुत्तीर्ण

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