इलाज की तकलीफें, कीमोथेरेपी का दर्द, अस्पताल की लंबी रातें और थर्ड-फोर्थ स्टेज का गंभीर कैंसर… लेकिन इन सबसे ऊपर था बच्चों का हौसला। उम्र सिर्फ 3 से 13 साल, लेकिन इन नन्हें योद्धाओं ने वो जंग लड़ी, जो कई बार बड़े भी हार जाते हैं। बोन कैंसर, ब्रेन कैंसर, लिंफोमा या ग्लैंड कैंसर… नाम अलग-अलग थे, लेकिन तकलीफ और उससे लड़ने का जज्बा बहुत मजबूत था। इन बच्चों के माता-पिता ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। ईश्वर और डॉक्टरों पर विश्वास बनाए रखा और दिन-रात एक कर अपने बच्चों को जिंदगी की ओर लौटाया। शनिवार को करमटोली स्थित आईएमए हॉल में एचसीजी अब्दुर्र रज्जाक अंसारी कैंसर हॉस्पिटल की ओर से 18 ‘पीडियाट्रिक कैंसर चैंपियंस’ को सम्मानित किया गया। जानिए 3 ऐसे बच्चों की कहानियां, जो कैंसर को हराकर आज मिसाल बन चुके हैं… 9 साल का चिंटू : लिंफोमा को मात दी चिंटू (बदला हुआ नाम) की चार साल की आयु से ही गर्दन में गांठ थी, जिसे परिवार ने पहले हल्के में लिया। आयुर्वेदिक इलाज कराया गया, लेकिन जब गांठ बढ़ा, तबतक चिंटू 7 साल का को हो चुका था। यह 2023 की बात है। इसके बाद उसे लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे। जांच के बाद सच्चाई सामने आई, पता चला बच्चे को लिंफोमा (लसीका तंत्र से शुरू होने वाला कैंसर) है। पिता बताते हैं, बच्चे को 12 फाइल कीमोथेरेपी दी गई। वह छह से आठ महीने में पूरी तरह ठीक हो गया। अब बेटा 9 साल का है और पूरी तरह स्वस्थ है। 11 साल की पिंकी : पेट-गर्दन के कैंसर को हरा कर अब बिल्कुल स्वस्थ पिंकी (बदला हुआ नाम) सिर्फ 9 साल की थी, जब उसे पेट और गर्दन में थर्ड स्टेज के कैंसर का पता चला। यह पता चलते ही परिवार टूट गया था। पिंकी के पिता बताते हैं, हम पहले वेल्लोर गए थे, पर खर्चा सुनकर घबरा गए। बताया गया कि वही इलाज रांची में भी संभव है तो वापस लौटे। बच्ची ने छह महीने कीमोथेरेपी की पीड़ा झेली। पर आज बेटी बिल्कुल ठीक है। 5 साल की ट्विंकल : ब्रेन ट्यूमर को हराया िट्वंकल (बदला हुआ नाम) सिर्फ तीन साल की थी, जब ब्रेन ट्यूमर की थर्ड स्टेज में पहचान हुई। पिता की आंखें भर आती हैं, जब वे बताते हैं कि मेदांता गुड़गांव में ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी करानी पड़ी। फिर रांची में 30 रेडिएशन सेशन और 6 कीमो सेशन हुए। बच्ची की हालत इतनी नाजुक थी कि हम उम्मीद छोड़ने लगे थे। लेकिन बच्ची ने ही हार नहीं मानी। इलाज में कुल 20 लाख से ज्यादा खर्च हुए, लेकिन आज बेटी पूरी तरह ठीक है और हंसते-खेलते बड़ी हो रही है। केवल ट्विंकल, चिंटू और पिंकी ही नहीं… कैंसर को मात देने वाले 18 बच्चे बने मिसाल ये बच्चे अब उम्मीद की किरण हैं… इन बच्चों की कहानियां सिर्फ मेडिकल सफलता नहीं, बल्कि इंसानी जज्बे और भरोसे की मिसाल हैं। ये बच्चे अब कैंसर पीड़ित अन्य बच्चों के लिए उम्मीद की किरण हैं। अस्पताल की उस अंधेरी सुरंग से बाहर निकले हैं, जहां रोशनी कम, हौसला ज्यादा था।


