शहीदी पर्व पर दुगरी में पाठों की लड़ी कराई, महिलाओं और बच्चों ने अहम भूमिका निभाई

भास्कर न्यूज | लुधियाना शहीदां दे सिरताज, श्री गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को समर्पित धार्मिक आयोजन लुधियाना में पूरे श्रद्धा और समर्पण से चल रहे हैं। दुगरी स्थित निष्काम सेवा सोसाइटी की ओर से 10 मई से शुरू की गई श्री सुखमणि साहिब जी के पाठों की लड़ी अब अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर है, जोकि गुरु जी के शहीदी दिवस 30 मई तक जारी रहेगी। इस धार्मिक समागम में स्त्री सत्संग सभा की सदस्याएं श्रद्धाभाव से श्री जपजी साहिब, श्री चौपाई साहिब और श्री सुखमणि साहिब का पाठ संगती रूप में करती हैं। सोसाइटी की प्रधान जसपाल कौर मखीजा और सुरिंदर कौर ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सेवा समर्पण, संगति और गुरु प्रेम का प्रतीक है। पाठों के उपरांत, बीबी सरबजीत कौर बेदी और अरविंदर कौर ढल ने अपने मधुर स्वर में शबद कीर्तन किया। संगत ने “जपियों जिन अर्जुन देव गुरु, धन धन गुरु अर्जुन देव जी साहिब, सुख तेरा दिता लाहिए और बिन गुर देखें नींद ना आवे जैसे शबदों का रसपान किया। कार्यक्रम का समापन सांझी अरदास के साथ हुआ, जिसके बाद गुरु का अटूट लंगर और छबील भी श्रद्धालुओं को वितरित की गई। बीआरएस नगर सेवा सोसाइटी की ओर से भी श्री सुखमणि साहिब के पाठों की लड़ी चलाई जा रही है। सोसाइटी की प्रधान तरनजीत कौर ने बताया कि जहां एक ओर सत्संग सभा की महिलाओं द्वारा नियमित पाठ किए जा रहे हैं, वहीं बच्चों को भी गुरबाणी से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों को श्री जपजी साहिब और श्री चौपाई साहिब के पाठ कंठस्थ करवाए जा रहे हैं, इसके साथ ही उन्हें अरदास और कीर्तन की विधि भी सिखाई जा रही है। इस सेवा में बीबी गुरुदर्शन कौर ने विशेष योगदान देते हुए बताया कि शहीदी दिवस के दिन बच्चे स्वयं कीर्तन करेंगे और अरदास भी करेंगे। उस दिन बच्चों द्वारा कंठ से पाठ प्रस्तुत किया जाएगा, जो संगत के लिए एक प्रेरणादायक दृश्य होगा। इन आयोजनों के माध्यम से जहां गुरु अर्जुन देव जी की बेमिसाल शहादत को याद किया जा रहा है, वहीं नई पीढ़ी को भी गुरबाणी और सेवा से जोड़ा जा रहा है, जो समाज के आध्यात्मिक भविष्य के लिए शुभ संकेत है।

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