भास्कर न्यूज ।चतरा जिले में जल नल योजना मद खाली है।यह स्थिति पिछले करीब देढ़ साल से बनी हुई हैं।इस मद में राशि नहीं रहने के कारण जिले में नल से घर -घर जल पहुंचाने की केंद्र सरकार की सपना अधूरी रह गई है। जिले में आवंटन के अभाव में जल नल योजना दम तोड़ रही है।राशि के अभाव में 460 से अधिक योजना प्रभावित है। इनमें 450 छोटी और 10 बड़ी योजना शामिल है। छोटी योजना में बोरिंग और बड़ी योजना में डैम से पेयजलापूर्ति करने की योजना है। योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले संवेदकों का करीब 150 करोड़ रुपए बकाया है।अधिक राशि बकाया रहने से संवेदक परेशान हैं। संवेदक योजनाओं का कार्य जारी रखने में असमर्थ हैं। इसलिए हाथ खड़े कर दिये हैं । उल्लेखनीय है कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजलापूर्ति को लेकर वर्ष 2019 में पेयजलापूर्ति योजना शुरु की गई थी। केंद्र सरकार की यह एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना मद में केंद्र और राज्य सरकार की भागीदारी बराबर की है। जिले के हरेक गांव और टोले में पाइपलाइन से घर घर शुद्ध जल पहुंचाने के उद्देश्य से 4500 योजना ली गई । इन प्रखंडों में चतरा, सिमरिया, टंडवा, यह योजना छोटी है, जिसका प्राक्कलन राशि करीब 8 से 10 लाख है। यह योजना सोलर आधारित है।इस योजना में डीप बोरिंग और सिंटेक्स के जलमीनार से घर घर नल से पेयजल आपूर्ति करना है। इस योजना में 3000 हजार से अधिक योजना पूरा कर ली गई है। इसके अलावा जिले के कुछ प्रखंडों में डैम से पेयजलापूर्ति करने की है। यह योजना बड़ा है। इसका प्राक्कलन राशि 40 लाख से अधिक की है। जिले के चतरा, कान्हाचट्टी, मयूरहंड और इटखोरी प्रखंड के कुछ गांव में पेयजलापूर्ति के लिए तिलैया डैम से पानी लाने की है। इसके लिए पाइपलाइन बिछाई जा रही है। कुछ भूमि वन विभाग में पड़ता है। अब तक वन विभाग से एनओसी नहीं मिली है। आवंटन पर टीकी है निगाहें सबकी निगाहें आवंटन पर टीकी है।चाहे पदाधिकारी हो या कर्मी या संवेदक। सभी आवंटन के लिए टकटकी लगाए हैं। संवेदकों को पिछली बार फरवरी 2024 में भुगतान मिला था। इसके बाद से जिले को आवंटन नहीं मिला है। जल नल योजना के मद में न तो केंद्र सरकार राशि दी है और ना ही राज्य सरकार। संवेदक आवंटन की आशन में पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। पर उन्हें निराश होना पड़ रहा है।


