मुहर, लोगो, हस्ताक्षर… बैंक गारंटी में सब नकली, बिना सत्यापन अफसरों ने कंपनियों को सौंपे टेंडर

आपसी मिली भगत से सरकारी राजस्व को पहुंचाया गया नुकसान
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 20 मई को दर्ज प्राथमिकी में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में हुए 38.44 करोड़ रुपए के घोटाला कैसे हुआ है इसकी परत खोली है। दो प्लेसमेंट एजेंसियों की फर्जी बैंक गारंटी की अधिकारियों ने जांच तक नहीं की। जिसकी वजह से 38.44 करोड़ का शराब घोटाला हुआ। बैंक गांरटी के संबंध में संबंधित बैंक के प्रबंधक द्वारा बताया कि यह बैंक गारंटी न तो बैंक द्वारा निर्गत किया गया है और न ही इस पर प्रयुक्त लेटर हेड, सिग्नेचर बैंक से संबंधित है। इसके बाद भी इन प्लेसमेंट एजेंसियों पर कार्रवाई नहीं की गई। एसीबी की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि उक्त दोनों प्लेसमेंट एजेंसियों ने वर्ष 2023 से ही फर्जी बैंक गारंटी दे उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पदाधिकारियों-कर्मियों की मिलीभगत से साजिश रचते हुए लगातार कार्य किया। नियमानुकूल रिकवरी नहीं होने पर मेसर्स विजन हॉस्पिटेलिटी सर्विसेज एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड पर मार्च 2025 तक 12 करोड़ 98 लाख 18 हजार 405 रुपए व मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्यूरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर मार्च 2025 तक 25 करोड़, 46 लाख 66 हजार 313 रुपये की देनदारी होने की बात सामने आई है। मार्शन इनोवेटिव ने जोन 4 में की थी मैनपॉवर सप्लाई
इसी तरह मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्यूरिटी सर्विसेज प्रा.लि. का चयन जोन-4 के अधीन धनबाद जिले की खुदरा शराब दुकानों में मैनपावर आपूर्ति के लिए हुआ था। कंपनी ने जेएसबीसीएल में पांच करोड़, दो लाख की बैंक गारंटी जमा की थी। जेएसबीसीएल ने फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद स्पष्टीकरण मांगा तो कंपनी के निदेशक जगन तुकाराम देसाई ने बताया कि उनके लोकल प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह ने धोखाधड़ी कर ऐसा किया है। मैनपॉवर आपूर्ति के लिए विजन हॉस्पिटेलिटी का चयन मेसर्स विजन हॉस्पिटेलिटी सर्विसेज एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड का चयन जोन दस के जिलों की खुदरा शराब दुकानों में मैनपावर आपूर्ति के लिए हुआ था। इसने ठेका लेने के लिए जेएसबीसीएल में पांच करोड़, 35 लाख 35 हजार 241 रुपये का फर्जी बैंक गारंटी जमा किया था। बैंक गारंटी पर कंपनी के प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह का हस्ताक्षर है। किसी भी पदाधिकारी ने किसी भी स्तर पर उक्त बैंक गारंटी का सत्यापन नहीं किया। 27 सितंबर 2024 को एसीबी ने दर्ज की थी पीई 27 सितंबर 2024 को एसीबी ने प्रारंभिक जांच (पीई) संख्या 03/2024 दर्ज हुई थी। एसीबी के इंस्पेक्टर विनय कुमार राम ने पूरे मामले की जांच की। जांच के क्रम में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के माध्यम से चयनित मैनपावर आपूर्ति करने वाली उपरोक्त दो प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा फर्जी बैंक गांरटी देकर सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाने का साक्ष्य सामने आया। एक चर्चा यह भी…क्या कोई बनने वाला था सीबीआई का गवाह शराब घोटाले में अचानक एसीबी के रेस हो जाने को लेकर सत्ता के गलियारे में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इसमें एक चर्चा यह भी है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ एवं झारखंड से जुड़े शराब घोटाले की सीबीआई जांच की अनुशंसा किए जाने के बाद सीबीआई एक्टिव हो गई थी। ऐसी चर्चा है कि झारखंड के कुछ अधिकारी इस मामले में सीबीआई के सामने सरकारी गवाह बनने को तैयार हो गए थे। इधर, झारखंड एसीबी शराब घोटाले में पीई दर्ज कर मामले की जांच में लगी थी। लेकिन, जांच की रफ्तार सामान्य सी ही थी। जब सीबीआई के सामने यहां के अधिकारी के सरकारी गवाह बनने की चर्चा सामने आने लगी, तो एसीबी और निगरानी विभाग रेस हो गया। मंगलवार को एसीबी को एफआईआर करने की अनुमति झारखंड सरकार से मिल गई। एसीबी में एफआईआर दर्ज हुई और दो बड़े अधिकारियों से पूछताछ हुई। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अन्य अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। इनके विरुद्ध दर्ज हुई है प्राथमिकी हाईकोर्ट में भी प्लेसमेंट एजेंसियों के स्थानीय प्रतिनिधि ने दाखिल किया था फर्जी पत्र{एसीबी ने प्रारंभिक जांच में खुलासे के बाद 20 मई को दर्ज प्राथमिकी में किया है उल्लेख शराब घोटाला दर्ज प्राथमिकी के शिकायतकर्ता एसीबी के इंस्पेक्टर विनय कुमार राम हैं। 13 नामजद व अन्य अज्ञात के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी में एसीबी ने बताया है कि किस तरह सबने मिलकर एक साजिश के तहत फर्जीवाड़ा किया और विभाग को राजस्व का नुकसान पहुंचाया। चयनित मैनपावर आपूर्ति करने वाली दो प्लेसमेंट एजेंसियों मेसर्स विजन हॉस्पिटेलिटी सर्विसेज एंड कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्यूरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने आपसी मिलीभगत से एक साजिश के तहत सामूहिक अपराध व साजिश के तहत फर्जी बैंक दस्तावेज का प्रयोग कर सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाया। इतना ही नहीं, इन दोनों ही प्लेसमेंट एजेंसियों के स्थानीय प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट में भी बैंक गारंटी अवधि विस्तार से संबंधित फर्जी पत्र दाखिल किया। एसीबी जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। विनय कुमार चौबे, तत्कालीन प्रधान सचिव उत्पाद एवं मद्य निषेध गजेंद्र सिंह, संयुक्त आयुक्त उत्पाद एवं मद्य निषेध {सुधीर कुमार, महाप्रबंधक संचालन सह वित्त, जेएसबीसीएल सुधीर कुमार दास, महाप्रबंधक वित्त, जेएसबीसीएल
नवेंदु शेखर, वरीय लेखापाल, जेएसबीसीएल
उदय कुमार दास, उच्च वर्गीय लिपिक, जेएसबीसीएल
अमित कुमार, उच्च वर्गीय लेखापाल, जेएसबीसीएल
मोहम्मद मोसीन कमाल राजा, उच्च वर्गीय लिपिक, जेएसबीसीएल
शीतल कुमारी, सहायक लेखापाल सह रोकड़पाल जेएसबीसीएल
मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विस एंड कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड निदेशक व अन्य पदाधिकारी
मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सेक्युरिटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक व अन्य पदाधिकारी
कंपनी के लोकल प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह {मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विस के लोकल प्रतिनिधि श्याम शरण व अन्य

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