लुधियाना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट अमन को मिला शौर्य चक्र:लड़ाकू विमान की छत्त उड़ी लेकिन हिम्मत नहीं हारे;राष्टपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित

पंजाब के लुधियाना के गांव हंस कलां के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट अमन सिंह हंस को राष्टपति द्रौपदी मुर्मू ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। केन्द्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी उन्हें बधाई दी है। बिट्टू ने सोशल मीडिया पर लिखा-आसमान की शान,धरती का बेटा, लुधियाना जिले के हंस कलां गांव के फ्लाइट लेफ्टिनेंट अमन सिंह हंस को एक खतरनाक मिश्न दौरान अपने लड़ाकू जहाज में हुए धमाके के बाद भी उसे बेमिसाल हौंसले के साथ सुरक्षित लेंड करवाया। जिस कारण कई लोगों की जान भी बच गई। उनकी इस बहादुरी के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उन्हें शौर्य चक्र से नवाजा गया है। यह पल उनके पिता (सेवामुक्त) करनल रूपिंदर सिंह हंस और समूह गांव के लोगों के लिए गर्व का पल है। यहां बता दें कि शौर्य चक्र देश का तीसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। अमन सात सितंबर 2020 से मिग-29 स्क्वॉड्रन में तैनात
फ्लाइट लेफ्टिनेंट अमन सिंह हंस ने अपनी सूझबूझ और शौर्य के दम पर विपरीत परिस्थतियों में एक बड़े हादसे को न केवल टाला बल्कि वायुसेना के विमान को सुरक्षित उतारने में कामयाबी भी हासिल की। उनके इसी अदम्य साहस को देखते हुए उन्हें शौर्य चक्र पुरस्कार से नवाजा गया है। फ्लाइट लेफ्टिनेंट अमन सिंह हंस को 15 जून 2019 में भारतीय वायुसेना की फ्लाइंग शाखा में एक लड़ाकू पायलट के रूप में कमीशन किया गया था। अमन सात सितंबर 2020 से मिग-29 स्क्वॉड्रन में तैनात हैं। जहाज की छत उड़ी मगर हिम्मत नहीं हारे अमन मीडिया रिपोर्ट्स मुताबिक पिछले साल 28 मार्च 2024 को अमन सिंह ने दो इंजन वाले मिग-29 फाइटर जेट से उड़ान भरी। रात के अंधेरे में अभ्यास गगन शक्ति-24 के तहत अमन ने लंबी दूरी के फेरी मिशन पर निकले। 20 मिनट की उड़ान के बाद उनका विमान 28,000 फीट यानी 8.5 किमी की ऊंचाई पर पहुंच गया। पायलट ने विमान के हेड अप डिस्प्ले और कॉकपिट में अचानक बड़ी हलचल महसूस की। तेज धमाके की वजह से उनकी आंखें तक बंद हो गईं।
दरअसल विमान की छत जमीन से 8.5 किमी ऊपर उड़ चुकी थी। वहां तापमान माइनस 35° से 40° सेल्सियस रहा। ऐसी स्थिति में पायलट को डीकंप्रेशन और हाइपोक्सिया बीमारी हो सकती है। हवा के तेज झटकों से आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ सेकेंड में जहाज को किया कंट्रोल
कठिन परिस्थितियों में भी अमन सिंह ने अपना धैर्य और साहस कायम रखा। उन्होंने कुछ ही सेकेंड में विमान का नियंत्रण अपने हाथों में लिया। इसके बाद उन्होंने स्टैंडबॉय रेडियो कंट्रोल का इस्तेमाल करके मामले की जानकारी नियंत्रण एजेंसियों को दिया और तुरंत पास के एयरबेस में उतरने का फैसला किया।

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