रां भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे समेत राज्य की कई हॉकी खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली हॉकी कोच प्रतिमा बरवा का रविवार को निधन हो गया। पैरालिसिस अटैक के बाद उन्हें रांची के पारस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। जहां वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं। रविवार सुबह आठ बजे डॉक्टरों ने उनके निधन की पुष्टि की। उनके पार्थिव शरीर को अस्पताल से खूंटी के बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम ले जाया गया। वहां हॉकी खिलाड़ियों ने श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्हें तोरपा के कोचा गांव में दफनाया गया। मूल रूप से खूंटी जिले के कोचा गांव की प्रतिमा बरवा अभी कुंजला में रह रही थीं। पैरालिसिस अटैक के बाद रांची के निजी अस्पताल में भर्ती थीं, सुबह आठ बजे ली अंतिम सांस सीएम ने कहा: मेहनतकश बेटियों का आदर्श थीं प्रतिमा कोच प्रतिमा बरवा के निधन पर सीएम हेमंत सोरेन ने दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- उनका निधन हॉकी जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। झारखंड समेत देश को कई प्रतिभाशाली अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी देने वाली हॉकी कोच प्रतिमा बरवा जी का असामयिक निधन अत्यंत दुखदायक है। झारखंड की मेहनतकश बेटियों का आदर्श थीं प्रतिमा जी। प्रतिमा मैम का कोचिंग स्टाइल काफी सख्त था। लेकिन उसमें सिर्फ अनुशासन और खिलाड़ियों के भविष्य की चिंता झलकती थीं। गलती करने पर वे लड़कियों से धूप में ग्राउंड का चक्कर लगवाती थी। अगर कोई हॉकी सेंटर या स्कूल न जाए तो वे हॉकी स्टिक लेकर उनके कमरे पर पहुंच जाती थीं। उस समय हमें लगता था कि वे हम पर गुस्सा करती हैं, लेकिन अब समझ में आता है कि वह भी प्यार ही था। राष्ट्रीय स्तर के मैच में अच्छा प्रदर्शन करने पर वे फोन पर बधाई देती थीं। खराब प्रदर्शन पर भी तत्काल बताती थीं कि कहां गलती हुई। इसे कैसे सुधार सकते हैं। साल 2012 में मैंने सिमडेगा बालिका आवासीय हॉकी प्रशिक्षण केंद्र में प्रतिमा बरवा से प्रशिक्षण लेना शुरू किया। करीब पांच साल तक उनके निर्देशन में खेल की बारीकियां सीखीं। मैम ने हर छोटे-बड़े स्किल पर ध्यान दिया। जैसे गेंद कैसे पास करनी है, गोल कैसे करना है, खेल पर ध्यान कैसे केंद्रित करना है। उन्होंने झारखंड की आधा दर्जन से ज्यादा खिलाड़ियों को नेशनल टीम तक पहुंचाया। वे 2010-11 से ही हॉकी की ट्रेनिंग दे रही थीं। उन्होंने जिन खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, उनमें सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग और महिमा टेटे आदि शामिल हैं। उन्होंने जितना खेल सिखाया, उतना ही जीवन जीना भी सिखाया। उनकी कमी कभी पूरी नहीं होगी। क्योंकि हमने सिर्फ एक कोच नहीं, एक मां समान मार्गदर्शक को खो दिया है। अभी वे रहतीं तो जूनियर खिलाड़ियों को भी उनके अनुभव का लाभ मिलता। झारखंड में महिला हॉकी को बुलंदियों पर पहुंचाने वाली कोच प्रतिमा बरवा नहीं रहीं


