पीडब्ल्यूडी के दो विंग आमने-सामने:खमतराई ओव​रब्रिज से रोज 2 लाख लोग पूरी बारिश गड्ढों से होकर गुजरेंगे

रायपुर-बिलासपुर रोड को कनेक्ट करने वाले जिस खमतराई ओवरब्रिज से रोज 2 लाख से ज्यादा वाहन गुजरते हैं, उसमें कई जगह डामर की परत गायब है। एक्सपांसन ज्वाइंट के पास का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। इससे गुजरते समय तेज कार और बाइक सवार सभी को झटका लगते हैं। लगभग हर पैनल के पास ऐसे गड्‌ढे हो चुके हैं, जिन्हें पार करते समय जरा सी लापरवाही बरतने पर गिरने का खतरा रहता है। इस वजह से 800 मीटर लंबे इस फ्लाईओवर से गुजरते समय रोज हजारों लोग परेशान हो रहे हैं।
पीडब्ल्यूडी विभाग हर साल बारिश के पहले सड़क और ओवरब्रिज के गड्‌ढों को पाटता है, लेकिन इस साल शहर के इस सबसे महत्वपूर्ण ओवरब्रिज के गड्‌ढे अब तक पाटे नहीं गए और अब संभव भी नहीं है। क्योंकि न पीडब्ल्यूडी विभाग की सड़क बनाने वाली दोनों एजेंसियां भवन एंड रोड और सेतु निर्माण विंग के अफसर आपस में झगड़ रहे हैं। अफसरों की झगड़ों की वजह से ओवरब्रिज के गड्‌ढों को भरने और मरम्मत का इसका प्रस्ताव ही नहीं बनाया गया है।
मानसून की छत्तीसगढ़ में एंट्री हो चुकी है ऐसे में अगर अब सरकारी प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव बनाकर भेजा जाता है तो कागजी प्रक्रिया में ही 4 माह लग जाएंगे। यानी मानसून के दौरान रोज हजारों लोग गड्‌ढों से होकर गुजरेंगे।

2002 में बना है ये महत्वपूर्ण ओवरब्रिज
खमतराई रेलवे क्रासिंग के ऊपर पीडब्ल्यूडी ने 2002 में ओवरब्रिज बनाया था। यातायात का दबाव पड़ने से ओवरब्रिज के एक्सपांसन ज्वाइंट के पास बेरिंग कोट खराब हो गई है। इतना ही नहीं ओवरब्रिज से लगातार भारी वाहन गुजरने की वजह से गड्ढे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि गड्ढे से ओवरब्रिज को खतरा पैदा हो गया है। अगर इसकी जल्द ही मरम्मत कर ठीक नहीं किया गया तो यह कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। पीडब्ल्यूडी के अफसरों की रिपोर्ट के अनुसार ओवरब्रिज पर डामर टिक ही नहीं रहा है। यही वजह है कि यहां प्रत्येक पैनल के आस-पास गड्ढे होने लगते हैं। ब्रिज पर यातायात का भारी दबाव होने के कारण गड्ढों में डामर और गिट्टी भरे जाने के बाद भी ठीक नही हो रहे हैं।
बारिश में गड्ढे नहीं आते नजर:
बारिश में ही गड्ढों में पानी भर जाता है, जिस वजह से सड़क के गड्ढे वाहन चालकों को नजर नहीं आ रहे हैं और वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इसके बाद भी न ही जनप्रतिनिधि और न ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) इस और ध्यान दे रहा है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *