भास्कर न्यूज | अमृतसर हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी के रूप में मनाई जाती है। इस बार संतों की एकादशी 6 जून को और सनातनियों की एकादशी 7 जून को मनाई जा रही है। शहर के दुर्ग्याणा तीर्थ, शिवाला बाग भाईया, मजीठा रोड श्री गंगाहर सनातन धर्म मंदिर, गोपाल मंदिर, खंडवाला पिशोरी नगर स्थित श्री सनातन धर्म शिव मंदिर, श्री सनातन धर्म पंजाब महावीर दल हनुमान मंदिर, पंचरत्न श्री कृष्ण मंदिर, शिवाला भूतनाथ महादेव समेत शहर के अन्य मंदिरों में निर्जला एकादशी 7 जून को मनाई जाएगी जहां ठंडे मीठे जल की छबील और लंगर लगाया जाएगा। वहीं भक्तों की ओर से अपने पितरों को याद करते हुए हाथ पंखे, खरबूजे, शरबत और ठंडाई प्रसाद के रूप में चढ़ाई जाएगी। मजीठा रोड स्थित श्री गंगा हर सनातन धर्म मंदिर के पंडित सूरज भारद्वाज और पंडित संदीप कौशिक ने बताया कि साल भर में लगभग 24 एकादशियां होती हैं। इनमें से निर्जला एकादशी सबसे महत्वपूर्ण और फलदाई होती है। ‘निर्जला’ का अर्थ है- बिना जल के। इस दिन व्रती पूरा दिन अन्न, जल, फल आदि सबका त्याग करके उपवास करते है। यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, परंतु इसकी पुण्य प्राप्ति सभी 24 एकादशियों के व्रत के बराबर होती है। भीमसेन ने यह व्रत बहुत कठिनाई से किया और उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हुआ। इसी कारण इसे “भीम एकादशी’ भी कहते हैं। इस दिन उपवास, दान-पुण्य, गीता पाठ और भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। उन्होंने बताया कि यह व्रत पापों से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति और पिछले जन्मों के कर्मों के शुद्धिकरण का साधन माना गया है। इसे करने वाला व्यक्ति अगले जन्मों में श्रेष्ठ जीवन पाता है। निर्जला एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि स्व-अनुशासन, आत्म-नियंत्रण और संयम का भी प्रतीक है। यह व्रत हमें हमारी इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मिक बल को जागृत करने की प्रेरणा देता है।


