शिल्पग्राम में उत्सव के चौथे दिन मंगलवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया भी पहुंचे। मुक्ताकाशी रंगमंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह महोत्सव जहां ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का प्रतीक है, वहीं यहां देश के कोने-कोने से अपने उत्पाद लेकर आए आर्टिजन कई वर्षों से ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश दे रहे हैं। ये कलाकार भी सम्माननीय हैं, जो प्राचीन भारतीय संस्कृति को सहेजे हुए हैं। राज्यपाल कटारिया ने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान और उनकी टीम को महोत्सव के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान राजस्थानी गुर्जर समुदाय के चरी डांस में सिर पर जलती आग वाली चरी लिए नृत्यांगनाओं ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया। गुजराती आदिवासी डांस राठवा, हिमाचल प्रदेश के सिरमौरी नाटी, कर्नाटक के देवी उपासना के नृत्य पूजा कुनिथा, गुजरात के तलवार रास समेत कई लोकनृत्य हुए। मांगणियार गायन सहित अन्य कार्यक्रम आज शिल्पग्राम में बुधवार को ओडिशा का लोकनृत्य गोटीपुआ, रेगिस्तान का मांगणियार गायन, मणिपुर का पुंग ढोल चेलम और पश्चिम बंगाल का राय बेंस दर्शकों का मन मोहेंगे। इन लोक नृत्यों में गोटीपुआ और राय बेंस डांस में कलाकार एक्रोबेटिक एक्शन भी दिखाएंगे। इनके अलावा भारतीय पारंपरिक खेल मल्ल खंभ के करतब भी देखने को मिलेंगे।


