राजधानी सहित राज्य के कई शहरों में नशीली दवाओं की खुलेआम सप्लाई को रोकने औषधि निरीक्षकों ने मेडिकल दुकानों में छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस के साथ ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम नशीली दवाओं की सप्लाई के सिस्टम और बिलिंग की जांच कर रही है। प्रतिबंधित दवाएं किसे और कितनी दी जा रही है, इसका रिकार्ड रखा जा रहा है या नहीं, ये भी चेक किया जा रहा है। पिछले 2 महीनों के दौरान राजधानी के अलावा अलग-अलग शहरों में 25 दुकानों के लाइसेंस निलंबित और निरस्त किए जा चुके हैं। ड्रग इंस्पेक्टरों का फोकस नारकोटिक दवाओं की खरीदी बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड पर है। उसका बिल कैसे बनाया जा रहा है, ये चेक करने के साथ भी दुकानों के सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में सूखे नशे का ट्रेंड ज्यादा बढ़ा है। नशीली और प्रतिबंधित दवाएं जो डाक्टर की पर्ची के बिना लोगों सीधे नहीं बेची जा सकती, ऐसी दवाएं खुलेआम बेची जा रही हैं। ड्रग माफिया बाइक और कार में घूम-घूमकर बेचते हुए पकड़े जा रहे हैं। इसी को देखते हुए दवा दुकानों पर सख्ती शुरू की जा रही है। बताया गया है कि बीते दो महीने में 2920 मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया।


