भास्कर न्यूज | अमृतसर शहर में माता-पिता अब अपने बच्चों को फिट रखने और बीमारियों से बचाने के लिए डांस का सहारा ले रहे हैं, तो युवा और बुजुर्ग भी डॉक्टरों की सलाह पर डांस के जरिए एक्टिव रहने की कोशिश कर रहे हैं। डांस एक्सपर्ट के अनुसार, यह न सिर्फ बच्चों और अन्य के स्टेमिना और लचीलापन बढ़ाने में मदद कर रहा है, बल्कि उन्हें एक्सरसाइज का आनंददायक तरीका भी मिल रहा है। कई माता-पिता का मानना है कि उनके बच्चे, जो पहले कम एक्टिव थे, अब डांस की वजह से ज्यादा एनर्जेटिक और हेल्दी महसूस कर रहे हैं। कई डांस अकेडमी विशेष फिटनेस ओरिएंटेड बैच चला रहीं हैं। शहर की अकादमियों में किसी में 50 से 60 तो किसी में करीब 100 बच्चे रोजाना पहुंच रहे हैं। एक 16 साल का युवा, जिसके दादा और पिता दोनों को डायबिटीज है, उसके पैरेंट्स पहले से सतर्क हैं। वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे को भी यह समस्या हो, इसलिए उन्होंने उसे डांस क्लास जॉइन करवाई। इससे न सिर्फ उसकी फिटनेस बेहतर हो रही है। 25 से लेकर 50 वर्ष तक के युवा और अन्य जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं और उन्हें डायबिटीज है, डॉक्टर ने उन्हें शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की सलाह दी थी। उनके लिए यह चिंता का विषय था कि वह रेगुलर एक्सरसाइज करें और उसका ब्लड शुगर कंट्रोल में रहे। उन्होंने डांस क्लास को एक हल के रूप में देखा, क्योंकि इसमें उन्हें आनंद भी आता है और फिजिकल एक्टिविटी भी होती है। अब वह नियमित डांस प्रैक्टिस से अपनी शुगर लेवल को कंट्रोल करने में सक्षम हो रहे हैं। डायबिटीज एक्सपर्ट डॉ. रोहित महाजन का कहना है कि, खासकर उन बच्चों और अन्य उम्र के लोग जो मोटापे या डायबिटीज से जूझ रहे हैं। डांस, जिम्नास्टिक्स या स्पोर्ट्स जैसी एक्टिविटीज से न सिर्फ उनका वजन संतुलित रहता है, बल्कि उनकी मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं और मन शारीरिक ताकत भी बढ़ती है। डायबिटीज पेशेंट के लिए यह एक शानदार तरीका है, जिससे उनकी ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखा जा सकता है। इस वजह से लोग डांस या फिर साइकलिंग के जरिए फिट रखने की सलाह दी जा रही है। एक प्रोफेशनल डांस इंस्ट्रक्टर राजविंदर सिंह राजा ने बताया कि बच्चों और अन्य में फ्लेक्सिबिलिटी, स्टैमिना और बैलेंस को बढ़ावा मिल रहा है। बच्चों की सेहत के प्रति जागरूक माता-पिता सिर्फ डांस सिखाने के लिए ही नहीं, बल्कि फिटनेस के लिहाज से भी उनको डांस क्लास भेज रहे हैं। सभी को जुम्बा, भंगड़ा मसाला, फ्लेक्सिब्लिटी एक्सरसाइज, जिम्नास्टिक, एक्रो योग और बॉलीवुड वर्कआउट जैसी डांस एक्सरसाइज करवाई जा रही हैं। हर दिन अलग-अलग डांस स्टाइल सिखाए जाते हैं, ताकि उनको वैरायटी मिले और वे बोर न हों। 15 साल के बच्चे के माता-पिता ने उसे रोज एक घंटा डांस प्रैक्टिस करानी शुरू की, क्योंकि उसका वजन तेजी से बढ़ रहा था। बच्चे का वजन उम्र के हिसाब से काफी ज्यादा हो गया था, जिससे वह जल्दी थक जाता। डांस को मजेदार फिजिकल एक्टिविटी के रूप में चुना, ताकि वह एक्टिव रहे।


