भास्कर न्यूज| चाईबासा/ बंदगांव दीक्षित सर नहीं रहे। जिसने भी सुना, एका एक चुप रहा या फिर पूछा कि ओह व कराईकेला हाईस्कूल के दीक्षित सर। कराईकेला हाईस्कूल के संस्थापक सदस्य और पूर्व हेडमास्टर गौरीशंकर दीक्षित का निधन हो गया है। ओडिशा के भुवनेशवर स्थित उत्कल हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। 16 जून 2025 की रात को वे 77 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। उनके निधन की सूचना मात्र से चक्रधरपुर- केरा-कराईकेला क्षेत्र में शोक की लहर है। उनके पैतृक गांव चक्रधरपुर के बाईपीड गांव में 17 जून 2025 को उनका अंतिम संस्कार किया जा चुका है। दीक्षित सर के नाम से वे पूरे ग्रामीण इलाके में और शिक्षा जगत में जाने जाते थे। जब बंदगांव घाटी नीचे के इलाके के पहाड़ी गांव के बच्चे शहर तक पढ़ाई करने आने से परेशान थे, तब उन्होंने 1971 के दशक में रांची-चाईबासा रोड किनारे कराईकेला हाईस्कूल की नींव कराईकेला इलाके के कई शिक्षाविद व समाजसेवियों के साथ मिलकर किया था। उनकी इस पहल के बाद लगभग 40 साल तक वे इसी स्कूल के हेडमास्टर बने रहे। हजारों छात्र-छात्राओं की जिदंगी उन्होंने ज्ञान देकर सजाया संवारा। समाजिक, कृषि, साहित्य संस्कृति क्षेत्र में वे सक्रिय रहे। अपने जीवन काल में सदा ही शिक्षा को खास महत्व दिया। उनके ही प्रयास से कराईकेला इंटर कॉलेज की भी स्थापना हुई। वह सदा ही लोगों को शिक्षित करने में अपनी संपूर्ण जिंदगी को न्योछावर कर दिया। दीक्षित सर’ मतलब एक ऐसी शख्सियत जिनके नाम मात्र से हजारों शिष्यों के मस्तक झुक जाता है। ग्रामीण और बंदगांव घाटी नीचे के पिछड़े इलाके के वे शैक्षिक माइलस्टोन रहे। साल 1971 के दशक में वे और कराईकेला इलाके के कई शिक्षा प्रेमियों ने कराईकेला स्कूल की नींव रखी। उसी स्कूल को हाईस्कूल बनाया। उसके वे आजीवन हेडमास्टर रहे। साल 2009 में उच्च विद्यालय कराईकेला से वे सेवानिवृत्त हुए थे। स्थापना से रिटायर तक रहे हेडमास्टर


