नियम तोड़े तो “प्यार’, “करतार’, “लिबड़ा’ समेत 12 प्राइवेट बसों के काटे चालान

भास्कर न्यूज | जालंधर प्राइवेट बसों के खिलाफ सचिव रीजनल ट्रांसपोर्ट अथारिटी बलबीर राज सिंह की अगुआई में वीरवार को 5 घंटे तक जालंधर बस स्टैंड और जिले की अलग-अलग मुख्य सड़कों पर स्पेशल नाका लगाया गया। इस दौरान दर्जनों प्राइवेट बसों की चैकिंग की गई और 12 बसों के चालान किए गए। आरटीए बलबीर राज सिंह के साथ पंजाब रोडवेज के जनरल मैनेजर मनिंदर पाल सिंह और उनकी टीम भी मौजूद रही। आरटीए और जीएम की तरफ से दोपहर 2 से शाम 7 बजे तक अलग-अलग जगहों रामामंडी, विधिपुर फाटक, करतारपुर, जालंधर बस स्टैंड पर स्पेशल नाका लगा कर बसों के कागजात चैक किए गए। जिसमें बसों का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, टैक्स अपडेट, इंश्योरेंस, टाइम टेबल, परमिट, कंडक्टर और ड्राइवर की फिटनेस चैकिंग की गई। ज्यादातर बसें टैक्स चोरी कर सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान कर रही थी। ऐसी प्राइवेट ऑपरेटरों की बसों के पास इंश्योरेंस भी नहीं मिली। इस कारण 12 प्राइवेट बसें जिनमें प्यार, करतार, लिबड़ा सहित अन्य बसें शामिल थीं, के चालान किए गए। बस स्टैंड के आस-पास भी दर्जन भर से ज्यादा बसों की चैकिंग की गई। चैकिंग आगे भी जारी रहेगी। जालंधर बस स्टैंड के अंदर चालान किए गए वाहनों के कागज चेक करते जनरल मैनेजर मनिंदर पाल सिंह, टीएम राजपाल व अन्य। दूसरी तरफ बस स्टैंड फ्लाइओवर और गढ़ रोड की तरफ से चलने वाली स्लीपर कोच बसों के खिलाफ भी आने वाले दिनों में चैकिंग होगी। जनरल मैनेजर मनिंदर पाल सिंह ने बताया कि वीरवार को बस स्टैंड के पास 2 प्राइवेट बसों के चालान काटे है लेकिन इस दौरान स्लीपर कोच बस नहीं निकली। उनके खिलाफ पिछले महीनों आधा दर्जन स्लीपर कोच बसों के चालान काटे है उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में आरटीए के साथ मिलकर स्लीपर कोच बसों के चालान भी काटे जाएंगे। सरकारी और प्राइवेट बसों में किसी भी तरह का प्रैशर हॉर्न बैन है और कैरियर लगाने की भी मनाही है। 95 फीसदी बसों में प्रैशर हॉर्न लगा हुआ है जिससे ध्वनि प्रदूषण होता है। बस ड्राइवर दो पहिया वाहनों के पीछे जाकर अचानक हॉर्न बजाते हैं जिससे वह वाहन पर अपना नियंत्रण खो बैठते हैं। प्रैशर हॉर्न हटाना समय की जरूरत है। इसी तरह बसों पर कैरियर भी सरकार की तरफ से बैन किया गया है क्योंकि उससे एक तो टैक्स चोरी होती है और दूसरा इससे किसी हादसे को अंजाम देने वाली सामग्री भी ले जाई जा सकती है। प्राइवेट बसों में इसकी भरमार है। जिससे सरकार को रेवेन्यू नहीं मिल रहा।

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