भास्कर न्यूज | कवर्धा आचार्य पंथ श्री गृंध मुनि नाम साहब पीजी कॉलेज कवर्धा में एडमिशन का दौर जारी है। एडमिशन के दौरान स्टूडेंट्स से 400 रुपए जनभागीदारी शुल्क वसूले जा रहे हैं, जो कि बीते साल की तुलना में 100 रुपए ज्यादा हैं। इसे लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। नाराजगी के चलते सोमवार को कार्यकर्ताओं ने कॉलेज के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। कॉलेज प्रबंधन पर छात्रों का आर्थिक शोषण करने का आरोप लगाया। अभाविप के जिला संयोजक गजाधर वर्मा ने कहा कि कॉलेज में जनभागीदारी शुल्क में 100 रुपए की बढ़ोत्तरी की गई है। पिछले साल 300 रुपए लिए गए थे, इस बार 100 रुपए ज्यादा यानि 400 रुपए ले रहे हैं। कॉलेज में करीब 9 हजार स्टूडेंट्स (नियमित और अनियमित) पढ़ाई करते हैं। इस तरह स्टूडेंट्स पर 9 लाख रुपए का आर्थिक बोझ बढ़ेगा। आरोप है कि जनभागीदारी शुल्क वसूली के बाद भी स्टूडेंट्स को सुविधाएं नहीं दी जाती है। 50 लाख रुपए का गबन दोषियों पर कार्रवाई नहीं जिला संयोजक गजाधर वर्मा ने बताया कि पिछले वर्ष जनभागीदारी मद और शासन से मिले अन्य फंड के करीब 50 लाख रुपए की गड़बड़ी हुई थी। पूर्व प्राचार्य, बाबू और जनभागीदारी समिति अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगे थे। आरोप है कि मामले में प्रशासन ने केवल औपचारिक कार्रवाई की। अब तक गबन की राशि की वसूली नहीं हुई। इससे कॉलेज की जनभागीदारी गतिविधियां बंद हो गईं। वार्षिकोत्सव जैसे कार्यक्रम भी नहीं हो सके। दीगर कॉलेज की तुलना में कम ले रहे हैं: प्राचार्य पीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. ऋचा मिश्रा का कहना है कि जनभागीदारी समिति ने निर्णय कर शुल्क में 100 रुपए बढ़ोतरी की है। जिले के दीगर कॉलेज में जनभागीदारी शुल्क 450 रुपए ले रहे हैं। हमारे यहां फिर भी 400 रुपए है। जनभागीदारी से अतिथि शिक्षक व अन्य स्टाफ नियुक्त करते हैं। जनभागीदारी शुल्क तुरंत वापस लेने की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का आरोप है कि गबन हुई राशि की भरपाई अब नए छात्रों से बढ़ा हुआ शुल्क वसूली कर किया जा रहा है। जनभागीदारी शुल्क में बढ़ोतरी कर छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। यह पूरी तरह गलत है। परिषद ने मांग की है कि जनभागीदारी शुल्क तुरंत खत्म किया जाए। गबन के दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। गबन की गई राशि की पूरी वसूली की जाए।


