झारखंड हाईकोर्ट ने तुपुदाना थाना क्षेत्र में अपहरण के एक मामले में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए रांची के एसएसपी और तुपुदाना ओपी प्रभारी को 30 जून को सुबह 10:30 बजे अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने सूरजमणि उरांव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। मामले में याचिकाकर्ता ने बताया कि उनके बेटे का अपहरण हुआ था, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। हालांकि, बाद में पुलिस ने बच्चे को बरामद कर लिया, लेकिन इसके बाद याचिकाकर्ता पर कोई भी कार्रवाई नहीं करने के लिए दबाव बनाया गया और एक लिखित पत्र भी लिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सूरज वर्मा ने दलील दी कि प्राथमिकी दर्ज नहीं करना संज्ञेय अपराध है और यह पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है। वहीं पुलिस की ओर से यह कहा गया कि उन्होंने ही लड़के को बरामद किया, लेकिन यह नहीं बताया गया कि उन्होंने कार्रवाई की शुरुआत किस आधार पर की। इस पर नाराजगी जताते हुए न्यायालय ने पूछा कि जब संज्ञेय अपराध की सूचना मिली थी, तो प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रार्थी को भविष्य में किसी प्रकार की धमकी मिलती है, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


