भास्कर न्यूज| बलांगीर जहां आज के बच्चे जन्मदिन पर खिलौने और केक की फरमाइश करते हैं, वहीं बलांगीर के नन्हे मास्टर रीयांश ने अपनी 5वीं वर्षगांठ को सेवा और संवेदना की अनूठी मिसाल में बदल दिया। रीयांश ने अपने मम्मी-पापा प्रभर श्रीवास्तव और शालू श्रीवास्तव से जिद की—”मैं इस बार केक नहीं काटूंगा… मैं भूखे लोगों को खाना खिलाना चाहता हूं। इस अद्वितीय जज्बे के आगे माता-पिता भी भावुक हो उठे और उन्होंने रीयांश की भावना को पूरा करने का संकल्प लिया। सहयोग फाउंडेशन, जो पिछले 3 वर्षों से लगातार जरूरतमंदों के लिए “अन्नपूर्णा भोजन वितरण कार्यक्रम” चला रहा है, उसकी सहायता से आज 700 से भी अधिक जरूरतमंदों को गरमागरम रोटी, सब्ज़ी व अचार का स्वादिष्ट भोजन वितरित किया गया। जैसे तुलसी के दो पत्तों से भी पूजा में सुगंध आती है, वैसे ही मास्टर रीयांश की ये छोटी-सी भावना, समाज में प्रेम और सेवा की महक फैला रही है।


