भास्कर न्यूज | अमृतसर अनुशासनहीनता का आरोप लगा कर आम आदमी पार्टी से 5 साल के लिए सस्पेंड किए गए विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में खुलकर अपनी बात रखी। कुंवर ने कहा कि आप के उच्च नेतृत्व की ओर से सस्पेंशन के बारे में अभी तक न तो कोई जानकारी दी गई है और न ही इस संबंध में कोई पत्र ही जारी किया गया है। इसलिए वह अभी भी आम आदमी पार्टी के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के संयोजक अरविंदर केजरीवाल की ओर से लिखित स्वराज पुस्तक के विचारों से जुड़े हुए हैं और पार्टी की मजबूती के लिए काम कर रहे थे और करते रहेंगे। कुंवर विजय प्रताप सिंह ने कहा कि अपनी पुलिस सर्विस छोड़ कर लोगों की सेवा करने के लिए सियासत में आए थे। उन्हें जनता ने विधायक बनाया। जिसके बाद उन्होंने विधानसभा के अंदर और बाहर लोगों की आवाज बनकर मुद्दे उठाए। उन्होंने पार्टी में रहते हुए सीवरेज की समस्या, सर्किट हाउस का मुद्दा, सरूप रानी महिला कॉलेज को दिल्ली के शीर्ष कालेज की तर्ज पर विकसित करने के अलावा जीएनडीयू और जीएनडीएच की अपग्रेडेशन जैसे मुद्दे उठाए हैं। इसके अलावा उन्होंने नशा, गैंगस्टरवाद और बरगाड़ी-बहबल कलां में बेअदबी और गोलीकांड के आरोपियों की सजा के मुद्दों को बड़े मंचों पर उठाया। कुंवर ने कहा कि वह आज भी केजरीवाल की ओर से पार्टी की विचारधारा कैसी हो, पर आधारित लिखी गई पुस्तक स्वराज का पालन कर रहा हूं। लेकिन बड़े दुख की बात है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व आप के सिद्धांतों को तिलांजलि दे चुका है। कुंवर ने कहा कि इस समय बहुत से ऐसे फसली बटेरे पार्टी में आ गए हैं, जो मौका परस्त है और मौका मिलते ही पार्टी को छोड़ जाएंगे। इसके अलावा पार्टी में गैंगस्टर और माफिया शामिल हो गए हैं, जिनके साथ वह खुद को असहज महसूस करते हैं। इस समय सिद्धांतहीन लोग पार्टी में शामिल हो चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पंजाब के लोगों के मुद्दों को तरजीह दी है और आगे भी देते रहेंगे। अंत में उन्होंने कहा कि जब पार्टी में उन्हें शामिल किया गया था, तो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में कहा था कि कुंवर विजय प्रताप सिंह के पार्टी में आने पर यदि सरकार बनती है, तो 6 महीने में गैंगस्टरवाद और नशा खत्म हो जाएगा। इतना ही नहीं, बरगाड़ी-बहबल कलां कांड के आरोपियों को सजा सुना कर लोगों को इंसाफ दिया जाएगा लेकिन जैसे ही सरकार बनी, माफिया के साथ मिल कर उक्त मुद्दे पीछे छूट गए।


