देवशयनी एकादशी आज:शुभ कार्यों पर विराम, अब शहनाइयां 22 नवंबर के बाद

भास्कर न्यूज | अमृतसर 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ ही देवों का शयन काल शुरू हो जाएगा। इसी के साथ ही चातुर्मास शुरू होगा और मांगलिक कार्यों जैसे शादी-ब्याह, नए काम की शुरुआत, गृह प्रवेश आदि पर विराम लग जाएगा। वहीं शादी-विवाह के लिए नवंबर माह का इंतजार करना होगा। देव उठनी एकादशी के बाद 20 दिन इंतजार करना पड़ेगा। पंडित राम अवतार और राधे श्याम के अनुसार 11 जुलाई से देवों के देव महादेव का सावन मास शुरू हो रहा है। इसके साथ ही अक्टूबर तक तीज-त्यौहार और उत्सवों का दौर चलता रहेगा। इस बार देवशयन काल 118 दिनों का होगा। इस बार तीज-त्यौहार, उत्सव पिछले साल से 11 दिन जल्दी आएंगे। 11 जुलाई से सावन शुरू होकर 8 अगस्त तक रहेगा। पंडित सुनील दत्त शर्मा ने बताया कि देवशयनी एकादशी के दिन गुरु प्रधान विशाखा नक्षत्र है और गोचर में गुरु उच्च के हैं। देव उठनी एकादशी भी 1 नवंबर को आनंद योग में है। उन्होंने कहा कि विवाह और नौकरी दोनों का ही कारक ग्रह गुरु है, जो सबको सफलता देगा। पंडित राधे श्याम ने बताया कि प्रबोधिनी एकादशी यानी देवउठनी एकादशी के 20 दिन बाद शादी-ब्याह के लग्न शुरू होंगे। नवंबर में 22, 23, 24, 25, 27, 29 और 30 को मुहूर्त हैं। दिसंबर में 4, 5 और 6 को शुभ लग्न हैं। इसके बाद 13 दिसंबर को शुक्र अस्त हो जाएगा। पंडितों के अनुसार 14 जुलाई को धनिष्ठा नक्षत्र और आयुष्मान योग का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन गणेश चतुर्थी का भी दुर्लभ संयोग है। वहीं दूसरे सोमवार यानि 21 जुलाई को रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे। कामिका एकादशी और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी शुभ संयोग है। इस दिन व्रत करने से भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की कृपा बरसेगी। सावन के तीसरे सोमवार को चंद्रमा पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में होंगे। सिंह राशि में चंद्रमा के होने से धन योग बनेगा। जबकि वृद्ध चतुर्थी का भी संयोग है। इस दिन भगवान शिव और गणेश जी के आशीर्वाद भक्तों को मिलेंगे। अंतिम सोमवार चार अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग, ब्रह्म और इंद्र योग में रहेगा। चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र और चित्रा नक्षत्र से वृश्चिक राशि पर संचार करेंगे। इसलिए जो लोग प्रभु भक्ति करेंगे उन्हें लाभ प्राप्त होगा।

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