संकट . 10 जुलाई को कृषि समिति की बैठक का बहिष्कार करेंगे

भास्कर न्यूज | बालोद कृषि विभाग, जिला प्रशासन के अफसर दावा कर रहे हैं कि खरीफ सीजन में कृषि कार्य प्रभावित न हो। इसके लिए सोसायटियों मंे पर्याप्त मात्रा में खाद की सप्लाई करवा रहे हैं। किसानों को आसानी से खाद उपलब्ध हो रहा है। वहीं दूसरी ओर हकीकत कुछ और है। हकीकत यह है कि खाद की किल्लत से किसानों को परेशानी हो रही है। ताजा मामला सुरेगांव समिति का है, जहां एक माह से यूरिया, डीएपी खाद की कमी से किसान परेशान हैं। शनिवार को कांग्रेस नेताओं, पदाधिकारियों के साथ निरीक्षण करने पहुंचे जिला पंचायत के सदस्य गुलशन चंद्राकर को क्षेत्र के किसानों ने अपनी समस्याएं बताई। जिपं सदस्य गुलशन चंद्राकर ने कहा कि पर्याप्त खाद न मिलने पर 10 जुलाई को कृषि उपसंचालक कार्यालय बालोद में प्रस्तावित कृषि समिति की बैठक का बहिष्कार कर आंदोलन, चक्काजाम करेंगे। मानसून सीजन की दस्तक के बाद बारिश होने से जिलेभर के अधिकांश किसान खेतों में धान की बोआई कर चुके है। रोपाई कार्य भी चल रहा है। सोसायटियों में खाद की कमी अब तक है। भाजपा जिलाध्यक्ष के गांव सुरेगांव समिति में खाद नहीं होने की जानकारी किसानों ने दी है। आवेदन दिए फिर भी समस्या दूर नहीं हुई खाद की समस्या से जूझ रहे किसान कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को आवेदन सौंपकर अपनी समस्या बता चुके है। इसके अलावा कांग्रेस के नेता, पदाधिकारी, कार्यकर्ता चक्काजाम कर चुके है बावजूद समस्या दूर नहीं हुई है। कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने कृषि विभाग के अफसरों को सोसायटियों के गोदाम में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने निर्देश दिए है बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं होने से किसान परेशान हो रहें है। जगन्नाथपुर, सांकरा सहित जिले के अन्य ब्लॉक के किसान कलेक्ट्रेट से लेकर कृषि विभाग के दफ्तर पहुंचकर समस्या बता चुके। गोड़ेला, गब्दी, भिलाई मंे भी इसकी किल्लत सुरेगांव के अलावा गोड़ेला, गब्दी, भालूकोन्हा, भिलाई सहित अन्य स्थानों मंे भी खाद की किल्लत से किसान जूझ रहें है। सुरेगांव में गोडमर्रा, भुरकाभाट, भेड़ी, शिकारीटोला, मनकी गांव के किसान खाद लेने पहुंचते है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कोदुराम दिल्लीवार, युवा कांग्रेस नेता सौरभ देशमुख, शिवकुमार, आशा बाई, पंचराम, रितिक देशमुख, , रामकुमार ने बताया कि मानूसन सीजन के पहले ही सोसायटियों के गोदाम में पर्याप्त मात्रा में खाद की सप्लाई होनी चाहिए ताकि जुलाई में भटकना न पड़ें। किसानों को राहत मिले।

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