श्रद्धा-नमन कार्यक्रम . कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को कवियों और साहित्यकारों ने दी श्रद्धांज​लि

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव देश के प्रख्यात कवि और हास्य-व्यंग्य के मसीहा साहित्यकार पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे को संस्कारधानी के कवियों एवं साहित्यकारों, ने श्रद्धांजलि दी। जिलेभर के सभी कलाकारों का एक जत्था रायपुर के श्रद्धा-नमन कार्यक्रम में शामिल होने 9 जुलाई को रवाना हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह शामिल हुए। उन्हें याद कर भाव पूरित श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन किया। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक, कवि-साहित्यकार आत्माराम कोशा ने बताया रायपुर के सालासर बालाजी धाम में कार्यक्रम हुआ। पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे को श्रद्धा-नमन करने दिल्ली, मुंबई राजस्थान, गुजरात सहित अन्य प्रदेशों से जाने-माने कवि साहित्यकारों का आगमन हुआ। श्रद्धा नमन कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हास्य-व्यंग्य के कवि पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत थे। सभी को हंसाने वाला महान कवि आज सभी लोगों को रुला कर चला गया। उनका आकस्मिक निधन होना देश और छत्तीसगढ़ राज्य और साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है। श्रद्धा नमन कार्यक्रम के बाद मानसिंह, लखनलाल साहू, पवन यादव ने महेंद्र साहू को छत्तीसगढ़ के प्रथम लोक पर्व हरेली में संस्कारधानी आने न्योता दिया। पद्मश्री दुबे को तुमडीबोड में पहली बार मंच मिला था कार्यक्रम में पंडित सुंदरलाल शर्मा साहित्य सम्मान राज्य अलंकरण से सम्मानित वरिष्ठ कवि, साहित्यकार रामेश्वर वैष्णव ने बताया कि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को सर्व प्रथम 1982 में साहित्य नगरी राजनांदगांव के ग्राम तुमडीबोड मे संत कवि पवन दीवान, लक्ष्मण मस्तुरिहा, मुकुंद कौशल आदि कवियों ने मंच उपलब्ध कराया था। उसके बाद से उनकी ख्याति देश-दुनिया में बढ़ती चली गई। वे छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में दर्ज कराने जुटे रहे। उनके अधूरे कार्य को पूरा करना ही स्व. दुबे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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