इंतजार बढ़ा: अब अध्यक्ष पद के आरक्षण का फैसला 7 को

भास्कर न्यूज| जांजगीर नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी में भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दल जुट गए हैं। सभी को 27 दिसंबर को होने वाले आरक्षण का इंतजार था, मगर गुरुवार की देर शाम फिर से संशोधन कर 7 जनवरी तक टाल दिया गया। जिला जांजगीर-चाम्पा की 3 नगर पालिका और 8 नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए आरक्षण 7 जनवरी तय होगा। नगर पालिका जांजगीर-नैला, चांपा, अकलतरा, नगर पंचायत शिवरीनारायण, सारागांव, राहौद, नरियरा, पामगढ़ नवागढ़, खरौद व बलौदा शामिल हैं। नगरीय निकाय व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों सहित लोगों में नगर प​लिका व नगर पंचायत अध्यक्षों के पदों के आरक्षण को लेकर कयासों का दौर तेज हो गया है। हर कोई अपने-अपने हिसाब से अनुमान लगा रहे हैं। निकाय चुनाव के लिए आरक्षण के पदों पर सबसे ज्यादा निगाहें राजनीतिक पार्टियों के दावेदारों की टिकी हुई है। नगर पालिका जांजगीर, चांपा व अकलतरा नगर की बात करें तो भाजपा कांग्रेस के दिग्गज पार्षदों के वार्ड ही आरक्षण की भेंट चढ़ चुका है। इसमें कई दिग्गज पार्षदों का वार्डों आरक्षण की भेंट चढ़ चुका है। ऐसे में अब वे अध्यक्ष की दावेदारी ठोकने का मन बनाया है। यदि आरक्षण उसके अनुसार हुआ तो महापौर टिकट की दावेदारी करेंगे, यदि नहीं हुआ तो आसपास के वार्डों में नई सियासी जमीन तैयार करने में जुट जाएंगे। ऐसे में वे आसपास के वार्डों की ओर निगाह जमाना शुरू कर दिया है। नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अध्यक्षों के पदों का आरक्षण होने के बाद निकायों की राजनीति गरमाएगी। साथ ही भाजपा-कांग्रेस के नेताओं में भी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाएगा। नगर पालिका जांजगीर-नैला में कांग्रेस अध्यक्ष पर तीखा प्रहार करने के लिए भाजपा अभी से रणनीति बनाना शुरू कर दी है। वहीं कांग्रेस भी निकाय चुनाव के लिए अपने स्तर पर सियासी समीकरण बनाने में जुटी हुई है। चौक-चौराहों में चर्चाएं बढ़ीं आरक्षण को लेकर जिला मुख्यालय के चौक-चौराहों सहित वार्डों में भी लोग चर्चा कर अपना तर्क दे रहे हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के अलावा चौक-चौराहों में अध्यक्ष के आरक्षण को लेकर चर्चा कर रहे हैं। अब नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद की जानकारी 7 जनवरी के आसपास पता चल जाएगा कि नगर पालिका में अध्यक्ष का आरक्षण पिछड़ा या सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हुआ। पिछड़ा वर्ग होने की स्थिति में सामान्य वर्ग के प्रत्याशी भाग नहीं ले सकते हैं, लेकिन सामान्य वर्ग का आरक्षण होने पर पिछड़ा वर्ग उस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

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