मप्र में बोनस का फॉर्मूला बदलेगा:धान पर अब क्विंटल में बोनस नहीं, प्रति हेक्टेयर 2 हजार रुपए देने की तैयारी

मप्र की भाजपा सरकार धान पर बोनस देने के अपने चुनावी संकल्प को पूरा करने के लिए इसके फॉर्मूले में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब समर्थन मूल्य पर प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस देने के बजाए सरकार सभी किसानों को बोबनी के रकबे के हिसाब से प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान देगी। ताकि उन छोटे और सीमांत किसानों को भी सरकारी मदद का लाभ मिल सके, जो एमएसपी पर अपनी फसल नहीं बेचते हैं या खुले बाजार में फसल बेचते हैं। गुरुवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा कि धान उगाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 2 हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा। संभवत: अगली कैबिनेट में इसे मंजूरी दी जा सकती है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मप्र में सालना औसतन 40 लाख हेक्टेयर में धान की बोवनी की जाती है। इस हिसाब से देखें तो राज्य सरकार को प्रति हेक्टेयर 2 हजार रुपए के अनुदान देने पर सालाना 80 करोड़ रुपए का वित्तीय भार आएगा। कैबिनेट के अन्य निर्णय सभी 11केवी फीडर्स पर सोलर पैनल लगेंगे प्रदेश के गांवों और किसानों को 24 घंटे बिजली देने के लिए मंत्रिमंडल ने सभी 33/11 केवी फीडर के सोलराइजेशन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। योजना से सोलर प्लांट में बनने वाली अतिरिक्त बिजली सीधे डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों में पहुंच सकेगी। इससे ट्रांसफार्मरों पर ओवरलोडिंग के कारण होने वाली लो-वोल्टेज और पावर कट की समस्या खत्म होगी। गांवों में 24 घंटे बिजली सुनिश्चित होगी। उपकेंद्रों के अपग्रेडेशन का खर्च भी बचेगा। संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि हर फीडर को सोलराइज करने पर करीब 4 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसमें से 1 करोड़ केंद्र सरकार अनुदान के रूप में देगी। सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में 29 किमी से अधिक लंबे घाट (तटबंध) का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 771 करोड़ रु. की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए इसका निर्माण किया जा रहा है। अब महंगाई के हिसाब से बढ़ेगा डॉक्टरों का स्टाइपेंड कैबिनेट ने आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के 9 सरकारी और स्वशासी कॉलेजों के इंटर्न और छात्रों के स्टाइपेंड को महंगाई भत्ते से जोड़ने की मंजूरी दी है। अब महंगाई भत्ता बढ़ने पर स्टाइपेंड भी बढ़ेगा। प्रदेश में ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई करने वाले मेडिकल छात्र-छात्राओं और डॉक्टरों को यह लाभ मिलेगा।

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