एमटीए का तर्क:नर्सिंग काउंसिल में विवादित नियुक्ति पर संघों ने उठाए सवाल, विरोध दर्ज कराया

मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल में भ्रष्टाचार होने की कई शिकायतों और हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच होने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा यहां बेदाग अफसरों की पोस्टिंग नहीं कर पा रहे हैं। हाईकोर्ट ने पूर्व में पदस्थ भ्रष्ट अधिकारियों को तत्काल हटाने के लिए कहा तो मप्र के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने नर्सिंग काउंसिल में अध्यक्ष के पद पर प्रमोटी आईएएस अफसर मनोज सरेयाम, रजिस्ट्रार के पद पर संयुक्त कलेक्टर केके रावत और डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर सीपी शुक्ला को जिम्मेदारी दी। इन नियुक्तियों से प्रदेश के चिकित्सा महासंघ ने जमकर विरोध जताया है। दरअसल, गंभीर आरोपों के चलते सीपी शुक्ला को पहले हटाया गया था। मप्र शासकीय स्वशासी चिकित्सा महासंघ (एमटीए) के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीया ने बताया कि प्रदेश के 15 हजार डॉक्टर्स है। क्या इसमें सरकार को एक भी उपयुक्त चिकित्सक इन पोस्ट के लिए नहीं मिला। उन्होंने डिप्टी सीएम को एक पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि चेयरमैन एवं रजिस्ट्रार पद पर तकनीकी विषय विशेषज्ञ द्वारा ही भरा जाना चाहिए। एनएसयूआई ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी गंभीर आरोपों के चलते हटाए गए चंद्रप्रकाश शुक्ला को दोबारा डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया गया है। यह फैसला न केवल नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने इस नियुक्ति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि सीपी शुक्ला पर नर्सिंग काउंसिल में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं, जिनकी शिकायत पर उन्हें पद से हटाया गया था। ऐसे विवादित व्यक्ति को दोबारा पद देना यह दर्शाता है कि नर्सिंग शिक्षा और प्रशासन में सुधार की जगह भ्रष्टाचार को संरक्षित किया जा रहा है। बिना विभागीय अनुमति के भोपाल में हाईकोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में शामिल हुए थे। यह कार्य विभागीय नियमों और अनुशासन का स्पष्ट उल्लंघन था जिसकी शिकायत 20 दिसंबर को प्रमुख सचिव से भी गई थी उसके बावजूद उन्हें नर्सिंग काउंसिल का डिप्टी रजिस्ट्रार बनाना शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। बार-बार अधिकारियों की नियुक्तियां करना असंवैधानिक इस तरह की नियुक्ति करना अधिकारियों की अफसरशाही प्रवृत्ति को दर्शाती है। तकनीकी पदों पर बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियां करना न केवल नियम विरूद्ध है बल्कि असंवैधानिक भी है। उन्होंने बताया कि 3 मई 2023 को किए गए आंदोलन के बाद सरकार ने स्पष्ट किया था कि वे तकनीकी पदों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति द्वारा भी इसका विरोध किया गया है। वहीं चिकित्सा शिक्षक अधिष्ठाता संघ ने आपात बैठक बुलाकर इस विषय का विरोध किया है। नहीं दिया जवाब… इन विषयों पर आयुक्त स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरूण राठी से बातचीत करने के लिए उन्हें कॉल किया गया। मैसेज पर विषय बताया गया इसके बावजूद उन्होंने कोई जवाब देना उचित नहीं समझा।

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